वैदिक ज्योतिष में देवताओं के गुरु बृहस्पति की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। देवगुरु बृहस्पति 12-13 महीने में चाल बदलते हैं। वे कर्क राशि में उच्च और मकर राशि में नीच होते हैं। गुरु ग्रह (बृहस्पति) धनु और मीन राशि के स्वामी हैं। ज्ञान, धर्म, और भाग्य के कारक माने जाने वाले गुरु वर्तमान में मिथुन राशि में विराजमान है और 2 जून 2026 को कर्क में प्रवेश करेंगे। गुरु के अपनी उच्च राशि कर्क में जाने से हंस राजयोग बनेगा। यह राजयोग सभी राशियों के जातकों पर अलग-अलग प्रभाव डालेगा, लेकिन 3 राशियों के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। आइए जानते हैं इन भाग्यशाली राशियों के बारे में…
कन्या राशि पर प्रभाव: 2026 में हंस राजयोग का बनना जातकों के लिए अनुकूल साबित हो सकता है। आय में वृद्धि हो सकती है। आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार मिल सकता है। स्वास्थ्य में सुधार होने के संकेत हैं। भाग्य का साथ मिलेगा। व्यापार में विस्तार के नए मार्ग खुलेंगे। बेरोजगारों को नई नौकरी के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। पिता के साथ रिश्तों में मजबूती आएगी। परिवार का भरपूर सहयोग मिलेगा। इस अवधि में लाभदायक यात्राओं के प्रबल योग बन रहे हैं।
तुला राशि का प्रभाव : हंस राजयोग बनने से जातकों के अच्छे दिन शुरू हो सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। सरकारी नौकरी या प्रशासन से जुड़े लोगों के लिए समय उत्तम रहेगा। व्यापारियों को अच्छा धनलाभ हो सकता है। कोई नया कार्य शुरू करने के लिए समय अनुकूल है। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। इस अवधि में निवेश से लाभ मिल सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगेगी।
कर्क राशि का प्रभाव : हंस राजयोग से जीवन के कई क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सफलता मिल सकती है। इस अवधि में घर, संपत्ति या वाहन खरीद सकते हैं। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई और बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। यह समय आर्थिक और व्यक्तिगत प्रगति लेकर आएगा। निवेश से लाभ मिलने की संभावना है। निवेश का काम सोच-समझकर करें, जल्दबाजी ना दिखाएं। संतान की ओर से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। लंबे समय से रुके हुए और अधूरे काम इस दौरान पूरे होंगे।
कुंडली में कब बनता है हंस राजयोग
वैदिक ज्योतिष में हंस राजयोग को बेहद शुभ और प्रभावशाली माना गया है। यह ‘पंच महापुरुष योग’ में से एक है, जो देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) की विशेष स्थिति के कारण बनता है। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में बृहस्पति (गुरु) अपनी स्वयं की राशि (धनु या मीन) में हो या अपनी उच्च राशि (कर्क) में स्थित हो, और वह केंद्र भावों (1, 4, 7, या 10वें घर) में बैठा हो, तब ‘हंस राजयोग’ का निर्माण होता है। इस तरह के राजयोग से जीवन में सुख, समृद्धि, मान सम्मान और ज्ञान की प्राप्ति होती है। शिक्षा, ज्योतिष, दार्शनिक, शोधकर्ता जैसे लोगों को भी विशेष लाभ मिलता है।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य वैदिक ज्योतिष मान्यताओं/पंचांग-आधारित गोचर गणना पर तैयार की गई है। व्यक्ति-विशेष पर परिणाम जन्मकुंडली, लग्न और दशा पर निर्भर करते हैं। MP Breaking News किसी भी भविष्यवाणी/दावे की गारंटी नहीं देता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)





