ज्योतिष शास्त्र में कुंडली, ग्रह और नक्षत्रों का बड़ा महत्व होता है। नवग्रहों में खास करके दैत्यों के गुरू शुक्र और ग्रहों के राजकुमार बुध की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। बुध संचार, बुद्धि, तर्कशास्त्र, गणित और व्यापार के कारक माने जाते है वे मिथुन और कन्या राशि के स्वामी हैं। शुक्र को सौन्दर्य, सुख का कारक माना जाता है, वे वृषभ व तुला स्वामी राशि है।मीन राशि को शुक्र की उच्च राशि व कन्या राशि को नीच राशि माना जाता है। वर्तमान में बुध कर्क राशि में विराजमान है और 30 अगस्त तक यहीं रहेंगे। 21 अगस्त को शुक्र भी कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, ऐसे में चन्द्रमा की राशि कर्क में बुध शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण होगा।वही मंगल शनि भी नवपंचम राजयोग बना रहे हैं। जो कई राशियों के लिए शुभ साबित हो सकता है।आईए जानते है कौन कौनी सी है वो लकी राशियां………..
डबल राजयोग और राशियों पर प्रभाव
तुला राशि: लक्ष्मी नारायण व नवपंचम राजयोग जातकों के लिए लकी साबित हो सकता है।भौतिक सुखों में वृद्धि होगी। लंबे समय से रूके व अटके कामों को गति मिल सकती है। बेरोजगार लोगों को नौकरी के अवसर मिल सकते है। करियर में नए मौके मिलेंगे। नौकरीपेशा को सैलरी हाईक के साथ पदोन्नति का तोहफा मिल सकता है। व्यापारियों के लिए समय अनुकूल रहेगा।अविवाहितों को विवाह के प्रस्ताव मिल सकते हैं।आत्मविश्वास में वृद्धि होगी । रिश्तों में सामंजस्य बना रहेगा। पिता के साथ संबंध मजबूत रहेंगे।
कुंभ राशि: लक्ष्मी नारायण और नवपंचम राजयोग अनुकूल साबित हो सकता है। किस्मत चमक सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा । नौकरीपेशा को वेतनवृद्धि के साथ पदोन्नति का तोहफा मिल सकता है। आपको संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार मिल सकता है। व्यापार में अचानक बड़ा लाभ हो सकता है।कानूनी मामलों में फैसला आपके पक्ष में आएगा । करियर में नई उपलब्धियां हासिल कर सकते है। गुप्त शत्रुओं पर विजय पा सकते है। आय में जबरदस्त बढ़ोतरी हो सकती है।
कर्क राशि: लक्ष्मी नारायण राजयोग का बनना जातकों के लिए वरदान से कम साबित नहीं होगा। पार्टनरशिप के काम से लाभ मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। आय में वृद्धि हो सकती है। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।विवाहितों का वैवाहिक जीवन शानदार रहेगा। समाज में मान- सम्मान, प्रतिष्ठा की प्राप्ति हो सकती है। नौकरीपेशा को प्रमोशन या नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। व्यक्तित्व में निखार आएगा। करियर में नई शुरुआत देखने को मिलेगी। धन की बचत करने में सफल होंगे।
क्या होता है लक्ष्मी नारायण और नवपंचम राजयोग
- ज्योतिष शास्त्र में लक्ष्मी नारायण राजयोग का विशेष महत्व बताया गया है, इसे बेहद ही शुभ माना गया है। जब किसी भी राशि में बुध और शुक्र ग्रह दोनों एक साथ होते हैं, तो लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण होता है।कहते है जिसकी कुंडली में यह योग बनता है उस पर लक्ष्मी जी की कृपा बरसती है, वहां धन धान्य की वर्षा होती है।
- ज्योतिष के मुताबिक, नवपंचम राजयोग तब बनता है जब दो ग्रह एक दूसरे से त्रिकोण भाव में स्थित हो जाते हैं। दोनों ग्रहों के बीच 120 डिग्री का कोण बनता है तथा एक ही तत्व राशि होती है। जैसै मेष, सिंह, धनु को अग्नि राशि, वृषभ, कन्या, मकर को पृथ्वी राशि, मिथुन, तुला, कुंभ को वायु राशि और कर्क वृश्चिक मीन को जल राशि माना जाता है, ऐसे में जब एक ही तत्व वाली दो राशियों में 2 ग्रह पहुंचकर 120 डिग्री का कोण, जिसे नक्षत्र के द्वारा भी जान सकते हैं, तो नवपंचम राजयोग बनता है।
(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है।इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)






