ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों, कुंडली और नक्षत्र का बड़ा महत्व माना जाता है। शुक्र को दैत्यों का गुरु और बुध को ग्रहों का राजकुमार माना जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वर्तमान में संचार, बुद्धि, तर्कशास्त्र और व्यापार के कारक कहे जाने वाले बुध धनु राशि (दृक पंचांग के अनुसार) में विराजमान हैं और 17 जनवरी तक यहीं रहेंगे। सौन्दर्य, सुख और धन के कारक माने जाने वाले शुक्र भी धनु राशि में स्थित हैं और 13 जनवरी तक यहीं रहेंगे। धनु राशि (गुरु की राशि) में बुध व शुक्र के साथ आने से लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण हुआ है। इस राजयोग का सभी राशियों के जातकों पर अलग-अलग देखने को मिलेगा, लेकिन 3 राशियों के लिए यह बेहद शुभ साबित हो सकता है। आइए जानते हैं इन राशियों के बारे में…
कन्या राशि पर प्रभाव:
- जातकों के लिए समय अनुकूल साबित हो सकता है।
- भौतिक सुखों की प्राप्ति हो सकती है।
- इस अवधि में वाहन और संंपत्ति खरीदने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनेंगी।
- समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
- पैतृक संंपत्ति और धन का लाभ मिल सकता है।
- माता और ससुराल वालों के साथ संबंध मधुर रहेंगे।
- कला क्षेत्र में आपको विशेष सफलता मिल सकती है।
धनु राशि पर प्रभाव:
- आर्थिक स्थिति में मजबूत होने के प्रबल संकेत हैं।
- विवाहितों का वैवाहिक जीवन शानदार रहेगा।
- व्यापारियों को अच्छा धनलाभ मिलने की संभावना है।
- इस अवधि में कारोबार का विस्तार कर सकते हैं।
- सामाजिक क्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि होने के योग हैं।
- अविवाहितों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं।
- जीवन में खुशियों की दस्तक हो सकती है।
- करियर के क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
कुंभ राशि पर प्रभाव:
- आय में वृद्धि के प्रबल योग बनेंगे। नए-नए स्त्रोत भी खुल सकते हैं।
- इस अवधि में परिवार और किस्मत का साथ मिलेगा।
- समाज में मान-सम्मान में वृद्धि के प्रबल योग हैं।
- देश-विदेश की यात्रा कर सकते हैं।
- निवेश से अच्छे लाभ मिलने की संभावना है।
- दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ अच्छे संबंध बनेंगे।
क्या होता है लक्ष्मी नारायण राजयोग
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में लक्ष्मी नारायण राजयोग का विशेष महत्व बताया गया है, इसे बेहद ही शुभ माना गया है। यह योग भगवान विष्णु (नारायण) और माता लक्ष्मी की कृपा को दर्शाता है। जब कुंडली में यह योग बनता है, तो व्यक्ति को जीवन में सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। जब किसी जातक की कुंडली के किसी भी भाव में बुध और शुक्र एक साथ (युति) बैठे हों, तो ‘लक्ष्मी नारायण राजयोग’ का निर्माण होता है।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य वैदिक ज्योतिष मान्यताओं/पंचांग-आधारित गोचर गणना पर तैयार की गई है। व्यक्ति-विशेष पर परिणाम जन्मकुंडली, लग्न और दशा पर निर्भर करते हैं। MP Breaking News किसी भी भविष्यवाणी/दावे की गारंटी नहीं देता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)





