होली के बाद ग्रहों के सेनापति मंगल और चंद्रमा मिलकर ‘महालक्ष्मी राजयोग’ बनाने जा रहे हैं। यह राजयोग शनि की राशि कुंभ में दोनों ग्रहों की युति से बनेगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, वर्तमान में साहस, शक्ति और ऊर्जा के कारक माने जाने वाले मंगल कुंभ राशि में विराजमान है। 16 मार्च 2026 को मन व धन के कारक कहे जाने वाले चंद्रमा भी कुंभ राशि (दृकपंचांग के अनुसार) में प्रवेश करने जा रहे हैं जिससे कुंभ राशि में मंगल और चंद्रमा की युति से महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण होगा। इस राजयोग से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। यह राजयोग धन, वैभव, और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है। वैसे तो इसका सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा लेकिन 3 राशियों को विशेष फल मिल सकता है। आइए जानते हैं इन भाग्यशाली राशियों के बारे में…
मकर राशि पर प्रभाव :
- नौकरीपेशा को पदोन्नति के साथ वेतनवृद्धि का लाभ मिल सकता है।
- अटका हुआ धन वापस मिल सकता है।
- लंबे समय से रुके काम पूरे होने के योग हैं।
- व्यापार में मुनाफे के साथ धनलाभ की प्राप्ति हो सकती है।
- नया कार्य शुरू करने के लिए समय उत्तम रहने वाला है।
- परिवार, पिता और जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत रहने के प्रबल योग हैं।
- इस अवधि में निवेश के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनने की संभावना है।
वृषभ राशि पर प्रभाव:
- भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है।
- लंबे समय से चली आ रही परेशानियां दूर होने के योग हैं।
- अविवाहित लोगों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं।
- आकस्मिक धन लाभ मिल सकता है।
- इस अवधि में पैतृक संपत्ति का लाभ मिलने के प्रबल संकेत हैं।
- नया बिजनेस शुरू करने के लिए समय अनुकूल रहने वाला है।
- बेरोजगार लोगों को नौकरी के अवसर मिल सकते हैं।
मिथुन राशि पर प्रभाव:
- परिवार के साथ भाग्य का साथ मिल सकता है।
- आय में वृद्धि होने की संभावना है।
- इस अवधि में देश- विदेश की यात्रा कर सकते हैं।
- नौकरीपेशा को पदोन्नति के साथ वेतनवृद्धि का तोहफा मिल सकता है।
- छात्रों का विदेश में जाकर पढ़ाई करने का सपना पूरा हो सकता है।
- व्यापार का विस्तार करने के लिए समय उत्तम रहेगा।
- पार्टनरशिप में किए गए व्यापार से लाभ मिलने के संकेत हैं।
कब बनता है महालक्ष्मी राजयोग
- वैदिक ज्योतिष में महालक्ष्मी राजयोग को सबसे शुभ माना जाता है। जब मंगल और चंद्रमा एक साथ शुभ भावों में हों तो यह राजयोग बनता है।
- वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब मंगल की शुभ दृष्टि चंद्रमा पर पड़ती है या दोनों केंद्र/त्रिकोण भाव में मजबूत स्थिति में होते हैं, या इन दोनों ग्रहों की युति बन रही हो, तब महालक्ष्मी योग का निर्माण होता है।
- मान्यता है कि मंगल और चंद्रमा की युति जब कुंडली में द्वितीय, नवम, दशम और एकादश भाव में हो रही हो तब अपार धन लाभ देता है।
- माना जाता है कि इस राजयोग के बनने से व्यक्ति पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। जीवन में अपार सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। समाज में मान-सम्मान मिलता है।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य वैदिक ज्योतिष मान्यताओं/पंचांग-आधारित गोचर गणना पर तैयार की गई है। व्यक्ति-विशेष पर परिणाम जन्मकुंडली, लग्न और दशा पर निर्भर करते हैं। MP Breaking News किसी भी भविष्यवाणी/दावे की गारंटी नहीं देता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)






