ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य और देवताओं के गुरु बृहस्पति की भूमिका अहम मानी जाती है। सूर्य आत्मा, पिता और सम्मान के कारक माने जाते हैं वहीं गुरु को ज्ञान, भाग्य, संतान, धन और दान-पुण्य का कारक माना जाता है। वर्तमान में कुंभ राशि (शनि की राशि) और गुरु मिथुन राशि (बुध की राशि) में विराजमान हैं। 5 मार्च 2026 को दोनों ग्रह एक-दूसरे से 120 डिग्री पर होंगे, जिससे नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा। ज्योतिष में इस राजयोग को लाभकारी और बेहद शुभ माना गया है। वैसे तो इस राजयोग का सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलेगा लेकिन इसके बनने से 3 राशियों के लिए लकी साबित हो सकता है। आइए जानते हैं इन भाग्यशाली राशियों के बारे में…
मिथुन राशि पर प्रभाव:
- जातकों को गुरु और सूर्य का भरपूर आर्शीवाद मिलने के योग हैं।
- भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है।
- छात्रों को उच्च शिक्षा पाने के लिए विदेश जाने का मौका मिल सकता है।
- व्यापार में मुनाफे के साथ नया सौदा मिल सकता है।
- नया व्यापार शुरू करने के लिए परिस्थितियां अनुकूल रह सकती हैं।
- नई नौकरी के कई अवसर मिल सकते हैं।
- वैवाहिक जीवन शानदार रहेगा। पार्टनर के साथ अच्छा वक्त बीत सकता है।
- स्वास्थ्य अनुकूल रहने के प्रबल योग हैं।
सिंह राशि पर प्रभाव
- साहस, आत्मविश्वास और आय में वृद्धि के प्रबल योग हैं।
- इस अवधि में परिवार में मांगलिक कार्य हो सकते हैं।
- पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझ सकते हैं ।
- संतान पक्ष से कोई खुशखबरी मिल सकती है।
- सामाजिक और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
- आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
- लंबे समय से चली आ रही परेशानियों से राहत मिल सकती है।
- पिता के साथ संबंधों में सुधार आएगा।
धनु राशि पर प्रभाव
- भाग्य और परिवार का साथ मिल सकता है।
- आध्यात्मिक और धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।
- इस अवधि में लंबी दूरी की यात्राएं कर सकते हैं।
- घर या वाहन खरीदने का मौका मिल सकता है।
- पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने के प्रबल योग हैं।
- आकस्मिक धनलाभ की प्राप्ति हो सकती है।
- नौकरीपेशा को वेतनवृद्धि के साथ पदोन्नति का तोहफा मिल सकता है।
ऐसे बनता है कुंडली में नवपंचम राजयोग
ज्योतिष के मुताबिक, नवपंचम राजयोग तब बनता है जब दो ग्रह आपस में पंचम (5वां) और नवम (9वां) भाव या राशि में स्थित होते है। पंचम भाव बुद्धि, शिक्षा, रचनात्मकता और संतान से जुड़ा होता है या जब दो ग्रह एक दूसरे से त्रिकोण भाव में स्थित हो जाते हैं या दोनों ग्रहों के बीच 120 डिग्री का कोण बनता है तथा एक ही तत्व राशि होती है।
ज्योतिष के मुताबिक, मेष, सिंह व धनु को अग्नि राशि, वृषभ, कन्या तथा मकर को पृथ्वी राशि, मिथुन, तुला और कुंभ को वायु राशि और कर्क, वृश्चिक एवं मीन को जल राशि माना जाता है, ऐसे में जब एक ही तत्व वाली दो राशियों में 2 ग्रह पहुंचकर 120 डिग्री का कोण बनाते हैं, तो नवपंचम राजयोग बनता है।
(डिसक्लेमर : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP Breaking News किसी भी ज्योतिषीय दावे या भविष्यवाणी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)






