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कब लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण? भारत में दिखाई देगा? सूतककाल मान्य होगा या नहीं ? आइए जानते हैं सबकुछ

Written by:Pooja Khodani
Last Updated:
Second Chandra Grahan 2026: साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण अगस्त में सावन की पूर्णिमा पर लगेगा। ये आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। आंशिक चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का केवल कुछ भाग पृथ्वी की छाया से ढकता है। आइए जानते हैं विस्तार से...
कब लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण? भारत में दिखाई देगा? सूतककाल मान्य होगा या नहीं ? आइए जानते हैं सबकुछ

वर्ष 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगा था और भारत में भी दिखाई दिया था जिसके चलते सूतककाल भी मान्य हुआ था। अब साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा। ​यह साल का आखिरी ग्रहण होगा, जो कि एक आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) होगा।

कब लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण

भारतीय समयानुसार, चंद्र ग्रहण 27 अगस्त की देर रात और 28 अगस्त की सुबह के बीच दिखाई देगा। इसकी कुल अवधि लगभग 5 घंटे 39 मिनट की होगी। यह सुबह 06:55 से दोपहर 12:30 बजे के बीच रहेगा। यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) होगा। हालांकि यह पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं है, फिर भी पृथ्वी की घनी छाया चंद्रमा के एक बड़े हिस्से को कवर करेगी, जिससे आसमान में एक अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा।

भारत को छोड़कर कहां-कहां दिखाई देगा

मुख्य रूप से उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के पश्चिमी हिस्सों में देखा जा सकेगा , लेकिन भारत में यह नजर नहीं आएगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।भारत में सूतक काल प्रभावी न होने के कारण मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और न ही शुभ कार्यों पर कोई रोक होगी। गर्भवती महिलाओं और अन्य लोगों के लिए जो नियम ग्रहण के दौरान बताए जाते हैं, वे भी इस बार अनिवार्य नहीं होंगे।

कब लगता है चन्द्र ग्रहण

  • ज्योतिष के मुताबिक, सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है, इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक दूसरे के बिल्कुल सीध में होते हैं। इस दौरान जब हम धरती से चांद देखते हैं तो वह हमें काला नजर आता है और इसे चंद्रग्रहण कहा जाता है।
  • आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान सिर्फ चांद का एक भाग पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है। चंद्रमा के धरती की तरफ वाले हिस्से पर धरती की छाया काली दिखाई देती है, कटा हिस्सा दिखाई देता है, तो वह इस पर निर्भर करता है कि किस प्रकार सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में हैं।

(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)

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