5 rajyog 2025: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, हर एक ग्रह एक निश्चित समय अंतराल के बाद राशि बदलता है ऐसे में ग्रहों की चाल बदलने से योग और राजयोग का निर्माण होता है, जिसका मानव जीवन और 12 राशियों पर बड़ा प्रभाव देखने को मिलता है। इसी क्रम में 800 साल बाद दिवाली के आसपास 5 राजयोग का निर्माण होने जा रहा है, इसमें शुक्रादित्य, हंस महापुरुष, नीचभंग राजयोग, नवपंचम और कलात्मक राजयोग शामिल है। वर्तमान में देवताओं के गुरू बृहस्पति कर्क, दैत्यों के गुरू शुक्र कन्या और ग्रहों के सेनापति सूर्य तुला राशि में विराजमान है। ज्ञान, बुद्धि, भाग्य, धन, धर्म के कारक गुरु के 12 साल बाद अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर गए है जिससे हंस महापुरुष राजयोग का निर्माण हुआ है। वैभव, सौंदर्य और ऐश्वर्य के कारक शुक्र के अपनी नीच राशि कन्या में आने से नीचभंग राजयोग बना है।2 नवंबर को शुक्र तुला में प्रवेश करेंगे जिससे पिता आत्मा के कारक सूर्य व शुक्र की युति से शुक्रादित्य राजयोग बनेगा। मन के कारक चन्द्र 17 नवंबर को तुला में प्रवेश करेंगे, ऐसे में चन्द्र शुक्र की युति से कलात्मक योग बनेगा।
5 राजयोग का राशियों पर प्रभाव
कर्क राशि पर प्रभाव : ग्रहों का गोचर और 5 राजयोग जातकों के लिए शुभकारी सिद्ध हो सकता है।समाज में मान- सम्मान की प्राप्ति हो सकती है। आकस्मिक धनलाभ हो सकता है। लंबे समय से अटका और फंसा हुआ धन मिल सकता है।आय के नए स्त्रोत बनेंगे, आय में वृद्धि होगी। व्यापार में बड़ा लाभ मिल सकता है।इस अवधि में निवेश से लाभ पा सकते है। शादीशुदा लोगों का वैवाहिक जीवन खुशनुमा रहेगा।
तुला राशि पर प्रभाव: ग्रहों का गोचर और 5 राजयोग का बनना जातकों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। नौकरीपेशा को पदोन्नति के साथ वेतनवृद्धि का तोहफा मिल सकता है।लंबे समय से पैसों से जुड़े अटके हुए मामले सुलझ सकते हैं। अचानक कोई पुराना निवेश बड़ा मुनाफा दे सकता है। करियर व कार्यक्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर सकते है।
मिथुन राशि पर प्रभाव: ग्रहों का गोचर और राजयोग जातकों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। किस्मत का साथ मिल सकता है। समय- समय पर आकस्मिक धनलाभ की प्राप्ति हो सकती है। इस अवधि में वाहन या प्रापर्टी खरीद सकते हैं। कारोबार का विस्तार कर सकते है, धनलाभ के प्रबल योग है। कोई धार्मिक या मांगलिक कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
कुंडली में कब बनते है ये राजयोग
- वैदिक ज्योतिष में हंस राजयोग को शुभ माना जाता है।जब किसी की कुंडली में बृहस्पति लग्न हो और यहां से चंद्रमा से पहले, चौथे, सातवें और दसवें भाव में कर्क, धनु या मीन राशि में होता हैं तो हंस राजयोग का शुभ योग बनता है। जिस भी जातक की कुंडली में बृहस्पति केंद्र भाव में होकर मूल त्रिकोण स्वगृही और उच्च राशि का होता है तो हंस राजयोग का निर्माण होता है।
- ज्योतिष के मुताबिक, यदि किसी कुंडली में एक उच्च ग्रह के साथ एक नीच ग्रह रखा जाता है, तो कुंडली में नीचभंग राजयोग बनता है।यदि किसी कुंडली में कोई ग्रह अपनी नीच राशि में बैठा हो और उस राशि का स्वामी लग्न भाव या चंद्रमा से केंद्र स्थान में हो तो कुंडली में नीचभंग राजयोग बनता है। यदि किसी कुंडली में कोई ग्रह अपनी नीच राशि में हो और उस राशि में उच्च होने वाला ग्रह चंद्रमा से केंद्र स्थान में हो तो नीचभंग राजयोग बनता है। यदि किसी कुंडली में किसी ग्रह की नीच राशि का स्वामी और उसकी उच्च राशि का स्वामी परस्पर केंद्र स्थान में हो तो नीचभंग राजयोग बनता है।
- ज्योतिष के मुताबिक, नवपंचम राजयोग तब बनता है जब दो ग्रह एक दूसरे से त्रिकोण भाव में स्थित हो जाते हैं। दोनों ग्रहों के बीच 120 डिग्री का कोण बनता है तथा एक ही तत्व राशि होती है। जैसै मेष, सिंह, धनु को अग्नि राशि, वृषभ, कन्या, मकर को पृथ्वी राशि, मिथुन, तुला, कुंभ को वायु राशि और कर्क वृश्चिक मीन को जल राशि माना जाता है, ऐसे में जब एक ही तत्व वाली दो राशियों में 2 ग्रह पहुंचकर 120 डिग्री का कोण, जिसे नक्षत्र के द्वारा भी जान सकते हैं, तो नवपंचम राजयोग बनता है।
(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है।इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)






