मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बुढ़ी इलाके में शराब दुकान के विरोध में चल रहा महिलाओं का आंदोलन एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार चर्चा की वजह आंदोलन नहीं, बल्कि धरना स्थल पर हुई एक अनोखी घटना है। यहां एक महिला ने अपने शराबी पति को सबके सामने खंभे से बांध दिया। महिला का आरोप था कि उसका पति शराब पीकर धरना स्थल पर पहुंचा और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करने लगा।
घटना के बाद कुछ देर के लिए मौके पर हंगामे जैसी स्थिति बन गई। आंदोलन में शामिल महिलाओं ने विरोध जताते हुए आरोपी के मुंह पर टेप भी लगा दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश देकर उसे खंभे से छुड़ाया। इस घटना के बाद एक बार फिर इलाके में शराबबंदी की मांग तेज हो गई है।
शराब दुकान हटाने की मांग पर अड़ी हैं महिलाएं
बालाघाट के बुढ़ी क्षेत्र में संचालित शराब दुकान को हटाने की मांग कोई नई नहीं है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि वे पिछले करीब 80 दिनों से लगातार धरना दे रही हैं। उनका आरोप है कि शराब की वजह से कई परिवार आर्थिक और सामाजिक परेशानी झेल रहे हैं। नशे के कारण घरों में आए दिन विवाद होते हैं, महिलाओं के साथ मारपीट की घटनाएं बढ़ रही हैं और बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है।
आंदोलन में शामिल महिलाओं का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन के सामने अपनी बात रखी, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। उनका कहना है कि जब तक शराब दुकान को यहां से नहीं हटाया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। महिलाओं का मानना है कि शराब की आसान उपलब्धता गांव के माहौल को खराब कर रही है और इसे रोकना जरूरी है। उनका दावा है कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत विरोध के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ी के हित में किया जा रहा है।
शराबी पति को खंभे से बांधने की घटना
धरने के दौरान जब संजू चौधरी नाम का व्यक्ति शराब के नशे में वहां पहुंचा, तो माहौल अचानक बदल गया। महिलाओं का आरोप है कि वह नशे की हालत में अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहा था और आंदोलन में बाधा डाल रहा था। इसी बात से नाराज होकर उसकी पत्नी ने उसे सार्वजनिक रूप से खंभे से बांध दिया। इस दौरान वहां मौजूद अन्य महिलाओं ने भी उसका विरोध किया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाया और व्यक्ति को खंभे से मुक्त कराया। फिलहाल पुलिस ने शांति बनाए रखने की अपील की है। वहीं आंदोलनकारी महिलाओं ने साफ कहा है कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन शराब दुकान हटाने की मांग से वे पीछे नहीं हटेंगी।
बालाघाट की यह घटना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि उन सामाजिक समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाता है, जिनका सामना कई गांव और कस्बे शराब की वजह से कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन महिलाओं की मांग पर क्या फैसला लेता है।






