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पधारो म्हारे देस: MP में 100 साल बाद जंगली भैंसों की वापसी, सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया 4 भैंसों का सॉफ्ट रिलीज

Written by:Shruty Kushwaha
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मध्यप्रदेश में करीब एक सदी बाद जंगली भैंसों की वापसी के साथ वन्यजीव संरक्षण को नई गति मिली है। मुख्यमंत्री ने कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसा पुनर्स्थापन योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पहल पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी बढ़ावा देगी।
पधारो म्हारे देस: MP में 100 साल बाद जंगली भैंसों की वापसी, सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया 4 भैंसों का सॉफ्ट रिलीज

MP Wild Buffalo Reintroduction

मध्यप्रदेश के वन्यजीव संरक्षण में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज बालाघाट जिले के कान्हा टाइगर रिजर्व में अंतर्गत जंगली भैंसा पुनर्स्थापना योजना का शुभारंभ किया। इस दौरान असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए चार युवा जंगली भैंसों को सॉफ्ट रिलीज किया गया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम प्रदेश की धरती से लगभग एक सदी पहले विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को वापस लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि “मध्यप्रदेश आज टाइगर, चीता और गिद्ध स्टेट के रूप में वन्यजीव समृद्धि का अग्रणी केंद्र बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में में प्रदेश में चीतों की ऐतिहासिक वापसी हुई। विलुप्त वन्य प्राणियों के पुनर्स्थापन के साथ मध्यप्रदेश देश में वन्यजीव संरक्षण की नई मिसाल प्रस्तुत कर रहा है।”

मुख्यमंत्री ने किया जंगली भैंसा पुनर्स्थापन योजना का शुभारंभ

मध्यप्रदेश में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक और कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जंगली भैंसा पुनर्स्थापन योजना का शुभारंभ किया। बालाघाट जिले के सूपखार क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में असम के काजीरंगा से लाए गए जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व में सॉफ्ट रिलीज किया गया। करीब 100 वर्षों पहले प्रदेश से विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति की वापसी को सरकार ने वन्य-जीव संरक्षण के नए अध्याय के रूप में देखा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि “आज का दिन मध्यप्रदेश के लिए ऐतिहासिक है। पीएम मोदी के मार्गदर्शन में हम विलुप्त प्रजातियों को वापस ला रहे हैं। जंगली भैंसों के पुनर्वास से घास के मैदानों का संरक्षण होगा, पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत बनेगा और स्थानीय स्तर पर पर्यटन बढ़ने से लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।”

उन्होंने बताया कि असम के मुख्यमंत्री डॉ. हेमंत बिस्वा सरमा के साथ हुई चर्चा के दौरान दोनों राज्यों के बीच वन्यजीवों के आदान-प्रदान पर सहमति बनी थी। इस अंतर्राज्यीय सहयोग से मध्यप्रदेश और असम के बीच एक नया रिश्ता स्थापित हुआ है।

इस तरह हुई स्थानांतरण की प्रक्रिया

इस योजना के पहले चरण में 19 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच काजीरंगा के विभिन्न क्षेत्रों से सात किशोर भैंसों का चयन किया गया। इनमें से चार भैंसों को 25 अप्रैल को लगभग 2000 किलोमीटर की दूरी तय कर कान्हा टाइगर रिजर्व लाया गया। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की निगरानी में सावधानीपूर्वक संपन्न हुई। सूपखार क्षेत्र में इन्हें नियंत्रित वातावरण में सॉफ्ट रिलीज किया गया है ताकि वे धीरे-धीरे नए परिवेश के अनुकूल हो सकें।

वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले से ही टाइगर और चीता स्टेट के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। राज्य में मगरमच्छ, घड़ियाल, भेड़िया और गिद्धों की भी अच्छी संख्या है। कूनो अभयारण्य में चीतों के सफल पुनर्वास के बाद अब गांधी सागर और नौरादेही में भी इसी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। जंगली भैंसों की वापसी इसी श्रृंखला का अगला चरण है।

पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

वन विभाग के अनुसार, जंगली भैंस घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके पुनर्स्थापन से न केवल जैव विविधता बढ़ेगी बल्कि अन्य वन्य प्रजातियों को भी लाभ मिलेगा। साथ ही, कान्हा में पर्यटन आकर्षण बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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