एक बहन के सात साल लंबे संघर्ष और इंतजार का आखिरकार अंत हो गया। मध्य प्रदेश के बालाघाट निवासी प्रसन्नजीत रंगारी पाकिस्तान की जेल से रिहा हो गए हैं। सात साल पहले लापता हुए प्रसन्नजीत को पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया था। गुरुवार को जब उसकी रिहाई की खबर परिवार को मिली और फोन पर बहन से बात हुई तो खुशी के आंसू छलक पड़े।
पाकिस्तान ने सात भारतीय नागरिकों को रिहा किया है, जिनमें 6 पंजाब के और एक बालाघाट के प्रसन्नजीत हैं। उन्हें वाघा बॉर्डर पर BSF के सुपुर्द कर दिया गया है। फिलहाल, मेडिकल जांच के लिए उन्हें अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल में रखा गया है।
बहन से फोन पर कहा- टिकट नहीं है
प्रसन्नजीत की बहन संघमित्रा के लिए 1 फरवरी का दिन यादगार बन गया। खैरलांजी पुलिस स्टेशन से उन्हें भाई की रिहाई की सूचना मिली। इसके बाद अमृतसर थाने से फोन आया और अधिकारियों ने प्रसन्नजीत से उनकी बात कराई। सात साल बाद भाई की आवाज सुनकर संघमित्रा उसे पहचान नहीं पाईं। उन्होंने फोन पर कहा, “भाई तू घर आ जा।” इस पर प्रसन्नजीत ने जवाब दिया, “मेरे पास टिकट नहीं है, तुम मुझे लेने आ जाओ।” अब परिवार के लोग प्रसन्नजीत को अमृतसर से घर लाने की तैयारी कर रहे हैं।
2017-18 में अचानक हो गए थे लापता
प्रसन्नजीत की कहानी काफी उलझी हुई है। वह साल 2017-18 में अचानक घर से लापता हो गए थे। परिवार ने काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। परिवार ने उनके जीवित होने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। लेकिन 2021 में एक फोन कॉल ने सब कुछ बदल दिया। परिवार को पता चला कि प्रसन्नजीत पाकिस्तान के बाटापुर में गिरफ्तार हैं और सुनील अदे के नाम से जेल में बंद हैं।
इसके बाद बहन संघमित्रा ने भाई को वतन वापस लाने की मुहिम छेड़ दी। उन्होंने सरकारी दफ्तरों से लेकर नेताओं तक के चक्कर काटे और लगातार अधिकारियों से संपर्क में रहीं। पिछले साल उन्होंने भाई के नाम एक चिट्ठी भी लिखी थी।
B.Pharma पास हैं प्रसन्नजीत
प्रसन्नजीत परिवार के होनहार छात्र रहे हैं। उन्होंने जबलपुर के गुरु रामदास खालसा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से B.Pharma की पढ़ाई की है। साल 2011 में उन्होंने मध्य प्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल में अपना रजिस्ट्रेशन भी करवाया था। वह पाकिस्तान कैसे पहुंचे, यह अभी तक एक रहस्य है।
प्रसन्नजीत के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, इसलिए उन्होंने जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। कलेक्टर ने परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। अमृतसर में प्रसन्नजीत की मेडिकल जांच पूरी होने के बाद उन्हें परिवार को सौंप दिया जाएगा।





