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इस दिन से होगी उज्जैन में शिव नवरात्रि उत्सव की शुरुआत, महाशिवरात्रि पर महाकाल नगरी में दिखेगा भव्य नजारा

Written by:Bhawna Choubey
Published:
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 6 फरवरी से शुरू होगा शिव नवरात्रि उत्सव, जो महाशिवरात्रि तक चलेगा। विशेष भस्म आरती, श्रृंगार दर्शन और अनुष्ठानों के बीच भक्तों को इस बार दस दिनों तक महाकाल के दुर्लभ स्वरूपों के दर्शन मिलेंगे।

उज्जैन की सुबह जब जय महाकाल के जयकारों से गूंजती है तो पूरा शहर एक अलग ही ऊर्जा से भर उठता है। हर साल की तरह इस बार भी महाकाल की नगरी उज्जैन में शिव नवरात्रि उत्सव की भव्य शुरुआत होने जा रही है। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु महाकालेश्वर मंदिर पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।

इस बार खास बात यह है कि शिव नवरात्रि उत्सव नौ नहीं बल्कि दस दिनों तक चलेगा। महाशिवरात्रि से पहले शुरू होने वाला यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इन दिनों भगवान महाकाल अलग-अलग दिव्य स्वरूपों में दर्शन देते हैं। यही कारण है कि उज्जैन इन दिनों भक्ति, आस्था और उत्सव का केंद्र बन जाता है।

उज्जैन में शिव नवरात्रि उत्सव कब से शुरू होगा?

महाकालेश्वर मंदिर में वैदिक परंपराओं के अनुसार शिव नवरात्रि उत्सव 6 फरवरी से शुरू होगा, जो 15 फरवरी यानी महाशिवरात्रि तक चलेगा। इस बार तिथि के कारण उत्सव एक दिन अतिरिक्त चलेगा इसलिए कुल दस दिनों तक यह पर्व मनाया जाएगा।

महाकाल मंदिर विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर माना जाता है जहां शिव नवरात्रि उत्सव विशेष वैदिक विधि-विधान के साथ आयोजित होता है। यहां हर दिन विशेष पूजन, रुद्र पाठ और भगवान महाकाल का अलग-अलग श्रृंगार किया जाता है।

उज्जैन शिव नवरात्रि उत्सव के दौरान गर्भगृह में 11 ब्राह्मण प्रतिदिन लघु रुद्र पाठ करते हैं। इसके बाद भगवान महाकाल को विशेष रूपों में सजाया जाता है, जिसे देखने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं।

इन दिव्य स्वरूपों में दर्शन देंगे महाकाल

शिव नवरात्रि के दौरान भगवान महाकाल के श्रृंगार का विशेष महत्व है। पहले दो दिनों में भगवान निराकार से साकार रूप धारण कर वस्त्रों में भक्तों को दर्शन देते हैं। तीसरे दिन से भगवान शेषनाग धारण करते हैं। इसके बाद हर दिन अलग-अलग दिव्य रूपों में महाकाल के दर्शन होते हैं। इनमें प्रमुख स्वरूप शामिल हैं जैसे, घटाटोप स्वरूप, उमा-महेश रूप, मन-महेश रूप, शिव तांडव स्वरूप। हर दिन का श्रृंगार अलग होता है और इसी कारण श्रद्धालु कई दिनों तक उज्जैन में रुककर दर्शन करते हैं।

महाशिवरात्रि के दिन क्या रहेगा खास?

इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन महाकाल मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं। सुबह 2:30 बजे से 4:30 बजे तक विशेष भस्म आरती होगी। इसके बाद पूरे दिन और रात भगवान महाकाल का जलाभिषेक चलता रहेगा। रात में भगवान का मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजन किया जाता है, जो साल में सिर्फ एक बार होता है। यह अनुष्ठान श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अगले दिन भगवान महाकाल को विशेष श्रृंगार कर सेहरा धारण कराया जाता है और दोपहर 12 बजे वर्ष की एकमात्र दिनकालीन भस्म आरती संपन्न होती है। यह परंपरा उज्जैन महाशिवरात्रि उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती है।

शिव नवरात्रि के बाद भी मिलेंगे विशेष दर्शन

जो श्रद्धालु शिव नवरात्रि के दौरान श्रृंगार दर्शन नहीं कर पाते, उनके लिए भी अवसर रहता है। दूज के दिन यानी 18 फरवरी को भगवान महाकाल के पंचमुखुटा स्वरूप के विशेष दर्शन कराए जाएंगे। यह दिन भी भक्तों के लिए खास होता है क्योंकि भगवान का यह स्वरूप साल में कम ही देखने को मिलता है। मंदिर में भस्म आरती के बाद पुजारी परिवार दस दिनों तक विशेष अनुष्ठान करते हैं, जिनका समापन ब्रह्मभोजन के साथ होता है।

उज्जैन में तैयारियां तेज

उज्जैन में अभी से तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई और सौंदर्यकरण का कार्य चल रहा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दे रहा है। दर्शन की लाइन, पार्किंग, पानी, चिकित्सा और ट्रैफिक की व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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