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महाकाल गर्भगृह दर्शन मामला, सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार, VIP प्रवेश पर इस अधिकारी का फैसला अंतिम

Written by:Banshika Sharma
Published:
सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में VIP दर्शन को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत ने इंदौर हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि गर्भगृह में प्रवेश का अधिकार उज्जैन कलेक्टर के पास ही रहेगा। इस फैसले के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह फिलहाल बंद ही रहेगा।
महाकाल गर्भगृह दर्शन मामला, सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार, VIP प्रवेश पर इस अधिकारी का फैसला अंतिम

नई दिल्ली/उज्जैन: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी दर्शन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने इंदौर हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति देने का अधिकार उज्जैन कलेक्टर को दिया गया था। इस फैसले के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा, इसका अंतिम निर्णय प्रशासनिक स्तर पर ही होगा और आम श्रद्धालुओं का इंतजार अभी और बढ़ गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अगर कलेक्टर किसी विशेष परिस्थिति में किसी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति देते हैं, तो उसे वीआईपी श्रेणी में ही माना जाएगा। अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश में किसी भी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं समझी और याचिका को खारिज कर दिया।

क्यों बंद है आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह?

महाकालेश्वर मंदिर में आम भक्तों के लिए गर्भगृह का प्रवेश पिछले साल 4 जुलाई 2023 से बंद है। शुरुआत में श्रावण मास की भारी भीड़ को देखते हुए इसे 11 सितंबर 2023 तक के लिए बंद किया गया था। मंदिर समिति ने तब आश्वासन दिया था कि श्रावण के बाद इसे फिर से खोल दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

दरअसल, अक्टूबर 2022 में ‘महाकाल लोक’ के लोकार्पण के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। जहां पहले प्रतिदिन 20 से 30 हजार भक्त आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख तक पहुंच गई है। मंदिर प्रशासन का तर्क है कि इतनी बड़ी संख्या में भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश देना व्यावहारिक और सुरक्षा की दृष्टि से संभव नहीं है। इसी वजह से दर्शन व्यवस्था को गणेश मंडप, कार्तिकेय मंडप और नंदी हॉल तक सीमित रखा गया है।

हाईकोर्ट के आदेश को मिली सुप्रीम चुनौती

गर्भगृह में प्रवेश पर रोक के खिलाफ इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए मंदिर समिति को निर्देश दिया था कि प्रवेश पर फैसला प्रशासनिक स्तर पर लिया जाए। कोर्ट ने यह तय करने का अधिकार उज्जैन कलेक्टर को सौंपा था कि कौन वीआईपी है और किसे विशेष परिस्थितियों में प्रवेश दिया जा सकता है। इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।

इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी काफी मांग उठती रही है। उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया और महापौर ने भी आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह खोलने की वकालत की थी। सांसद ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग भी की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम फैसले के बाद अब यह तय हो गया है कि प्रवेश पर अंतिम निर्णय जिला प्रशासन का ही होगा।