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उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे सामान्य हाईवे स्वीकृत होने पर किसानों ने सीएम का जताया आभार, मुआवजे की मांग भी दोहराई

Written by:Banshika Sharma
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उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे को एक्सेस कंट्रोल की जगह सामान्य हाईवे बनाने पर 62 गांवों के किसानों ने सीएम मोहन यादव का आभार जताया। हालांकि, उन्होंने जमीन अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए उज्जैन-इंदौर रोड की तर्ज पर बाजार मूल्य के अनुसार भुगतान की मांग दोहराई है।
उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे सामान्य हाईवे स्वीकृत होने पर किसानों ने सीएम का जताया आभार, मुआवजे की मांग भी दोहराई

उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर आ गया है। परियोजना को एक्सेस कंट्रोल रोड की बजाय सामान्य हाईवे के रूप में मंजूरी मिलने के बाद, प्रभावित 62 गांवों के लगभग 400 किसान शनिवार देर रात भोपाल पहुंचे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। किसानों ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया, लेकिन साथ ही जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर अपनी गहरी नाराजगी भी जताई।

किसानों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी मांगों को रखते हुए कहा कि प्रस्तावित मुआवजा राशि वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम है और यह उनके साथ अन्याय है। मुख्यमंत्री ने किसानों को धैर्यपूर्वक सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा।

एक्सेस कंट्रोल से राहत, पर मुआवजे पर चिंता

किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि अगर यह हाईवे एक्सेस कंट्रोल वाला बनता तो उनके गांवों की कनेक्टिविटी पूरी तरह से खत्म हो जाती। इससे उनका दैनिक आवागमन और कृषि गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित होतीं। सरकार द्वारा इसे सामान्य हाईवे में बदलने की मांग स्वीकार किए जाने से किसानों ने बड़ी राहत की सांस ली है। इसी आभार को प्रकट करने के लिए किसान भोपाल पहुंचे थे।

मुआवजे में बड़े अंतर का आरोप

किसानों ने बैठक के दौरान मुआवजे के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन द्वारा तय की गई मुआवजा राशि अन्यायपूर्ण है। किसानों ने उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड रोड परियोजना का उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी।

“उज्जैन-इंदौर परियोजना में किसानों को कई गांवों में लगभग 45 लाख रुपये प्रति बीघा तक का मुआवजा मिला था। इसके विपरीत, हमें उज्जैन-जावरा परियोजना के लिए सिर्फ 2 से 4 लाख रुपये प्रति बीघा की पेशकश की जा रही है।” — प्रभावित किसानों ने बताया।

किसानों का कहना है कि 2024-25 की गाइडलाइन में जमीन की कीमतों में मामूली वृद्धि की गई है, जो प्रति हेक्टेयर लगभग 1700 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक ही है। यह बाजार की वास्तविक कीमतों के आसपास भी नहीं है।

मुख्यमंत्री का आश्वासन

किसानों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितों का ध्यान रखेगी और जैसे उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड रोड में उचित मुआवजा दिया गया था, वैसा ही इस परियोजना में भी सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने किसानों से भरोसा बनाए रखने की अपील की और कहा कि उनकी मांगों पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। अब किसानों की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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