आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों ने अब गति पकड़ ली है। इसी क्रम में, शुक्रवार को उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय किन्नर अखाड़ा की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा सिंहस्थ में अखाड़े की व्यवस्थाओं, भविष्य की योजनाओं और संगठन को मजबूत करने पर केंद्रित था। इस अवसर पर एक भव्य समारोह में कई किन्नर संतों का पट्टाभिषेक भी किया गया।
उज्जैन के शिवांजलि गार्डन में आयोजित इस बैठक में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों से आए किन्नर संत और पदाधिकारी भी शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने की।
कई संतों को मिली नई जिम्मेदारियां
बैठक के बाद एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें विधि-विधान के साथ पट्टाभिषेक की रस्म पूरी की गई। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चांदी के शंख से दुग्धाभिषेक किया गया और संतों को केसरिया शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
इस समारोह में चार किन्नर संतों को महामंडलेश्वर की उपाधि से विभूषित किया गया:
- दिलीपनंद गिरी (सूरत, गुजरात)
- महाकालीनंद गिरी (तेलंगाना)
- कामाख्यानंद गिरी सीतारमण (राजस्थान)
- रेखानंद गिरी (प्रतापगढ़ गढ़ी मानिकपुर, उत्तर प्रदेश)
इसके अतिरिक्त, सात संतों को श्रीमहंत की उपाधि प्रदान की गई। इनमें गुजरात की नंदिनीनंद गिरी, महाराष्ट्र के अकोला से गणेशानंद गिरी और इंदौर से सुनहरी नंद गिरी, आकांक्षा नंद गिरी, गुंजन नंद गिरी, अलोपी नंद गिरी और खुशीनंद गिरी शामिल हैं।
सिंहस्थ में भूमि आवंटन की मांग
किन्नर अखाड़े के पदाधिकारियों ने बताया कि दो दिनों तक चली इस गहन बैठक में सिंहस्थ की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। अखाड़े की मर्यादाओं, नियमों और संगठन की मजबूती पर जोर दिया गया। एक महत्वपूर्ण मांग सरकार के समक्ष रखने का निर्णय लिया गया है।
“जिस प्रकार अन्य अखाड़ों के महामंडलेश्वरों को सिंहस्थ के दौरान भूमि आवंटित की जाती है, उसी तरह किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वरों के लिए भी अलग से भूमि उपलब्ध कराई जानी चाहिए।” — किन्नर अखाड़ा पदाधिकारी
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि किन्नर समाज को सनातन धर्म की मुख्यधारा से जोड़ने और समाज में उनके प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे। यह बैठक सिंहस्थ 2028 में किन्नर अखाड़े की भव्य और संगठित भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






