छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में अवैध रेत खनन को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जब प्रशासनिक टीम अवैध उत्खनन रोकने पहुंची तो कार्रवाई से बचने के लिए माफिया ने ऐसा कदम उठाया कि हर कोई सन्न रह गया।
गढ़वट रेत घाट पर कार्रवाई के दौरान नायब तहसीलदार राहुल साहू पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की गई। बताया जा रहा है कि अगर अधिकारी ने आखिरी पल में फुर्ती नहीं दिखाई होती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
बिलासपुर रेत घाट पर आखिर हुआ क्या?
जानकारी के अनुसार, प्रशासन को काफी समय से गढ़वट, सरवनदेवरी और खैरखुंडी इलाके में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की शिकायत मिल रही थी। इसी सूचना के आधार पर नायब तहसीलदार राहुल साहू रविवार को गढ़वट रेत घाट पहुंचे। वहां उन्होंने रेत से भरे एक ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश की।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रैक्टर चालक ने वाहन रोकने की बजाय अचानक तेज रफ्तार से अधिकारी की ओर बढ़ा दिया। यह देखकर नायब तहसीलदार ने तुरंत छलांग लगाकर खुद को बचाया। अगर वे एक पल भी देर कर देते, तो गंभीर हादसा हो सकता था। यह घटना बिलासपुर अवैध रेत खनन मामले को लेकर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
रेत माफिया क्यों हो रहे हैं इतने बेखौफ?
छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में अवैध रेत उत्खनन लंबे समय से बड़ी समस्या बना हुआ है। रेत की मांग बढ़ने के कारण कई जगहों पर अवैध खनन का धंधा फल-फूल रहा है। जानकारों का कहना है कि कई बार माफिया प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को धमकाने या हमला करने तक से नहीं चूकते। बिलासपुर रेत माफिया हमला इसी बढ़ते दुस्साहस की एक मिसाल माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय नदी किनारों पर अवैध उत्खनन आम बात हो गई है, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
घटना के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और ट्रैक्टर चालक तथा उससे जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि अवैध खनन में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही संबंधित क्षेत्रों में निगरानी और सख्ती बढ़ाई जाएगी।प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में रेत घाटों पर संयुक्त कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है ताकि अवैध उत्खनन को रोका जा सके।
अवैध रेत खनन से क्या नुकसान होता है?
अवैध रेत उत्खनन का असर सिर्फ कानून व्यवस्था पर नहीं बल्कि पर्यावरण पर भी पड़ता है। नदियों से लगातार रेत निकालने से जलस्तर नीचे चला जाता है। नदी किनारों का कटाव बढ़ जाता है और आसपास के गांवों को भी खतरा पैदा होता है। इसके अलावा पुलों और सड़कों की मजबूती पर भी असर पड़ता है।





