छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के एक छोटे से गांव जामझोर की यह खबर सुनकर हर अभिभावक चौंक सकता है। सरकारी प्राथमिक स्कूल, जहां बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए, वहां शिक्षक ही स्कूल से गायब मिले। जब स्थानीय लोगों ने स्कूल का हाल देखा तो पाया कि बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी एक स्वीपर यानी सफाईकर्मी निभा रहा था। इस मामले को समझने की कोशिश करते हैं, तो सामने आता है कि स्कूल में प्रधान पाठक सहित तीन शिक्षकों की पोस्टिंग होने के बावजूद कोई भी कक्षा में मौजूद नहीं था।
सरगुजा जामझोर प्राथमिक शाला मामला क्या है?
सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के जामझोर गांव की प्राथमिक शाला में नियमित रूप से पढ़ाई नहीं होने की शिकायतें पहले भी मिलती रही थीं। लेकिन हाल की घटना ने पूरे मामले को उजागर कर दिया। स्थानीय लोगों के मुताबिक जब स्कूल समय में जांच की गई, तो पाया गया कि कोई भी शिक्षक स्कूल में मौजूद नहीं था। बच्चों को एक सफाईकर्मी पढ़ा रहा था। बच्चे भी सामान्य ढंग से उसी से पढ़ाई कर रहे थे मानो यही रोज का नियम हो। जब प्रधान पाठक से पूछा गया कि वे स्कूल में क्यों नहीं थे तो उन्होंने कहा कि वे संकुल केंद्र चना लेने गए थे। यह जवाब सुनकर लोगों का गुस्सा और बढ़ गया।
शिक्षक मौजूद फिर भी पढ़ाई क्यों नहीं?
जानकारी के अनुसार स्कूल में एक प्रधान पाठक और दो अन्य शिक्षकों की नियुक्ति है। यानी कागजों पर स्टाफ पूरा है। लेकिन जमीन पर स्थिति अलग दिखती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिक्षक समय पर नहीं आते या जल्दी चले जाते हैं। कई दिन तो बच्चे बिना पढ़ाई के लौट जाते हैं। इस बार मामला इसलिए सामने आया क्योंकि सफाईकर्मी बच्चों को पढ़ाते हुए कैमरे में कैद हो गया।





