सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। यह तिथि जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु को समर्पित की गई है। फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को रंग भरी एकादशी के नाम से पहचाना जाता है। यह केवल भगवान विष्णु ही नहीं बल्कि माता पार्वती और भोलेनाथ को भी समर्पित है।
रंगभरी एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से भी पहचाना जाता है। इस व्रत को लेकर यह मान्यता है कि यह व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति दिलाने का काम करता है। चलिए आपको तारीख और शुभ मुहूर्त के बारे में जानकारी देते हैं।
रंगभरी एकादशी का मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 27 फरवरी की देर रात 12:33 मिनट पर होने वाली है। इस तिथि का समापन 27 फरवरी की रात 10:32 मिनट पर होगा। ऐसे में यह व्रत 27 तारीख को ही किया जाएगा।
ये है शुभ मुहूर्त
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:09 से 5:58 तक है। गोधूलि मुहूर्त शाम 6:17 से 6:42 तक है। अभिजीत मुहूर्त का समय दोपहर 12:11 मिनट से 12:57 तक है। विजय मुहूर्त का समय 2:29 से 3:15 तक है।
क्या है धार्मिक महत्व
रंगभरी एकादशी ऐसा दिन है जब भगवान विष्णु, माता लक्ष्म, महादेव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान है। इस दिन अन्न और धन का दान जरूर करना चाहिए। जो व्यक्ति एकादशी के दिन दान करता है उसके जीवन में धन लाभ के योग निर्मित होते हैं। रंगभरी एकादशी का व्रत करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती विवाह के बाद पहली बार काशी आए थे। यही वजह है कि काशी में इस दिन अलग ही उत्साह देखने को मिलता है।
इन चीजों का करें दान
- एकादशी के दिन आंवले का दान करने का बहुत महत्व माना गया है। इससे धन लाभ के योग बनते हैं और भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते हैं।
- अगर मानसिक शांति प्राप्त करना चाहते हैं तो इस दिन दूध, दही, चावल या सफेद वस्तु का दान करें। इससे व्यक्ति का तनाव दूर होता है।
- रंगभरी एकादशी के मौके पर कपड़ों का दान जरूर करें। जरूरतमंद को भोजन करवाएं। इस उपाय से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है और जीवन में खुशियां आती है।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।





