मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से पिछले तीन वर्षों में 1.66 लाख से अधिक किसानों के नाम हटाए जा चुके हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को घेरा है। जीतू पटवारी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा है कि “कृषि मंत्री जी मध्य प्रदेश के किसानों से पता नहीं किस बात का बदला ले रहे हैं।”
राज्यसभा में प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस कटौती से केंद्र से मिलने वाली सहायता में 93.77 करोड़ रुपये की कमी आई है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है। लाभार्थियों के नाम हटाने के प्रमुख कारणों में e-KYC अधूरी रहना, भूमि अभिलेखों में त्रुटि या अद्यतन न होना, आयकर दाता या अपात्र श्रेणी में आना और डुप्लीकेट या फर्जी पंजीकरण की पहचान जैसे कारण प्रमुख हैं।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से किसानों के नाम हटने पर विवाद
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपए की सहायता तीन समान किश्तों में DBT के जरिए दी जाती है। यह योजना फरवरी 2019 में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई थी और इसका पूरा व्यय केंद्र सरकार वहन करती है। मध्यप्रदेश में किसानों को राज्य की अतिरिक्त सहायता मिलाकर कुल 12,000 रुपये वार्षिक लाभ मिलता रहा है। प्रदेश में साल 2022 में लाभार्थियों की संख्या सबसे ज्यादा थी। लेकिन ई-केवाईसी अधूरा रहने, दस्तावेजी त्रुटियों, अपात्रता और सख्त सत्यापन अभियान के कारण पिछले तीन साल में लगभग 1.66 लाख से किसान योजना से बाहर हो गए है। वर्तमान में करीब 74 हजार किसानों की किस्तें ई-केवाईसी लंबित होने से अटकी हुई हैं।
जीतू पटवारी ने शिवराज सिंह चौहान पर साधा निशाना
कांग्रेस ने इसे बीजेपी सरकार की “किसान-विरोधी” नीति करार दिया है। जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि पहले एमपी सरकार की नीतियों के कारण प्रदेश के हर किसान परिवार पर औसतन 74,420 रुपए का कर्ज बढ़ गया। फिर अमेरिका से ट्रेड डील के जरिए किसानों के हितों पर असर पड़ा और अब प्रदेश के 1.66 लाख किसानों के नाम किसान सम्मान निधि से काट दिए गए हैं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कई पात्र किसानों को ई-केवाईसीकी तकनीकी उलझनों में फंसाकर उनका नाम हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि ई-केवाईसी जैसी तकनीकी प्रक्रिया से जुड़ी समस्या के लिए कोई नीतिगत समाधान ढूंढा जाए, जिससे सभी पात्र किसानों को उनका हक मिल सके।





