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MP NEWS: 7.48 लाख किसानों से 39.02 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जित, तौल पर्ची बनाने का समय बढ़ा, चना-मसूर उपार्जन 28 मई तक

Written by:Pooja Khodani
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मोहन सरकार ने प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है।
MP NEWS: 7.48 लाख किसानों से 39.02 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जित, तौल पर्ची बनाने का समय बढ़ा, चना-मसूर उपार्जन 28 मई तक

मध्य प्रदेश में अब तक 7 लाख 48 हजार किसानों से 39 लाख 2 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है।  किसानों को 6490.56 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। वहीं 14 लाख 75 हजार किसानों द्वारा स्लॉट बुक कराए गए हैं। स्लॉट बुकिंग की आखिरी तारीख 23 मई 2026 निर्धारित की गई है।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि तौल पर्ची बनाने का समय भी शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है।

बता दें कि किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है।

चने और मसूर उपार्जन अवधि 28 मई

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 23 मई 2026 कर दी गई है, इससे वंचित किसान भी पंजीयन कर अपनी उपज बेच सकेंगे।  प्राइस सपोर्ट स्कीम वर्ष-2026 के तहत लगभग 600 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। चने और मसूर की उपज के लिए उपार्जन अवधि 30 मार्च से शुरू होकर 28 मई 2026 तक निर्धारित की गई है। चने के लिए 6.49 लाख मीट्रिक टन एवं मसूर के लिए 6.01 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का लक्ष्य है। तुअर के लिए 1.31 लाख मीट्रिक टन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। चने का एमएसपी 5,875 रुपये प्रति क्विंटल और मसूर का एमएसपी 7,000 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।

1 अप्रैल से ई-किसान प्रणाली लागू 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाद्यान्न भंडारण योजना के तहत 3.55 लाख मीट्रिक टन नई भंडारण क्षमता निर्मित की जा चुकी है। भंडार योजना सामग्री के अंतर्गत 15 लाख मीट्रिक टन क्षमता के आधुनिक गोदाम बनाए जा रहे हैं, जिसमें से 11 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदामों का पंजीयन पूरा हो गया है। इससे किसान भावांतर में अपनी फसल बेचकर अधिक लाभ ले सकेंगे। 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश के सभी जिलों में ई-किसान प्रणाली लागू की गई है। ई-विकास प्रणाली और ई-किसान प्रणाली से किसानों को सभी योजनाओं, मंडी भाव, मौसम और तकनीकी सलाह की जानकारी मोबाइल पर मिल रही है। किसान रजिस्ट्री के तहत हर किसान को यूनिक आईडी दी जा रही है, जिसमें भूमि और फसल का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा। खेत की रजिस्ट्री से प्रत्येक खेत को जियो-टैग किया जा रहा है, जिससे फसल बीमा, नुकसान का आंकलन और ड्रोन से छिड़काव आसान होगा। प्रदेश में 53 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक खेती हो रही है और 6 हजार से अधिक क्लस्टर बनाए गए हैं। राष्ट्रीय स्तरीय आधुनिक खेती प्रणाली के तहत एक हजार से अधिक कृषि ड्रोन संचालक तैयार किए गए हैं।

Pooja Khodani
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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani
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