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“हवस के पुजारी” बयान पर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की आपत्ति बरकरार…बोले – जिन्हें बुरा लगा हो, लगना चाहिए हमें दिक्कत नहीं..

Written by:Amit Sengar
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नवरात्रि पर देवी आराधना पर कहा कि जब तक हम यह प्रण नहीं ले लेते कि अपनी बहन बेटियों की तरफ उठने वाली उंगली तोड़ नहीं देते, तब तक देवी की आराधना का कोई औचित्य नहीं है।
“हवस के पुजारी” बयान पर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की आपत्ति बरकरार…बोले – जिन्हें बुरा लगा हो, लगना चाहिए हमें दिक्कत नहीं..

Pandit Dhirendra Krishna Shastri : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री आए दिन चर्चा में बने रहते है। उन्होंने हाल ही में एक बयान दिया जिसको लेकर कहा कि मैंने किसी मजहब के लिए ऐसा नहीं बोला कि हवस का पुजारी ही क्यों बोला जाता है, हवस का मौलवी क्यों नहीं हो सकता है? इस बयान पर किसी मौलवी के आपत्ति उठाये जाने पर पलटवार करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जिन्हें बुरा लगा है उन्हें लगना चाहिए हमें दिक्कत नहीं..उन्होंने ये भी कहा कि सभी पुजारी गलत नहीं होते, फिर सभी को क्यों निशाना बनाया जाता है।

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि हम जातिवाद के बिलकुल पक्ष में नहीं है। हम सिर्फ हिंदुत्तव के पक्ष में है। लेकिन हमलोग इतने विचित्र लोग हैं। सनातनी केवल अपनी ही चीजों को मजाक बनाते हैं। अपने तीर्थो, संतो का मजाक, मंदिरों का मजाक, पाखंड की दुकान, संतो का मजाक ढोंगी पाखंडी। कभी आपने किसी मुल्ला को नहीं देखा होगा। मुसलमान कभी भी अपने मौलवियों की बेइज्जत नहीं करते हैं, लेकिन हमलोग करते हैं। हम लोग के दिमाग में बहुत ही प्रायोजित तरीके से ब्रेन को वॉश करने के लिए शब्दों को भरा जा रहा है।

नौ दिन दुर्गा दुर्गा , दसवें दिन मुर्गा मुर्गा

वहीं उन्होने नवरात्रि पर देवी आराधना पर कहा कि जब तक हम यह प्रण नहीं ले लेते कि अपनी बहन बेटियों की तरफ उठने वाली उंगली तोड़ नहीं देते, तब तक देवी की आराधना का कोई औचित्य नहीं है। हम ऐसे लोगो के विरोध में है जो नौ दिन तो दुर्गा दुर्गा , दसवें दिन मुर्गा मुर्गा करते है। भारत की बहन बेटियों के साथ होने वाले अत्याचार पर खुलकर बोले तभी नवदुर्गा सफल माना जाएगा।

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लेखक के बारे में
मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।” View all posts by Amit Sengar
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