भोपाल: भीषण गर्मी की शुरुआत से पहले ही भोपाल जिले में पानी की किल्लत को लेकर प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। गिरते भूजल स्तर के कारण कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रमसिंह ने शुक्रवार को एक आदेश जारी कर पूरे भोपाल जिले को ‘जल अभावग्रस्त’ क्षेत्र घोषित कर दिया है। इस आदेश के तहत, जिले में किसी भी तरह के निजी या अशासकीय नलकूप खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

यह प्रतिबंध 30 जून तक लागू रहेगा। प्रशासन का यह कदम पिछले साल की तुलना में लगभग 25 दिन पहले उठाया गया है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। पिछले वर्ष यह आदेश 7 अप्रैल को जारी हुआ था।

उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति या संस्था अवैध रूप से बोरिंग कराता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।

मप्र पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत, दोषी पाए जाने पर दो साल तक की कैद, दो हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसके अलावा, बोरिंग के लिए इस्तेमाल की जा रही मशीन को भी जब्त कर लिया जाएगा। संबंधित एसडीएम और पुलिस अधिकारियों को अवैध बोरिंग मशीनों को जब्त करने और एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

क्यों लिया गया यह फैसला?

प्रशासन के अनुसार, जिले में कृषि और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिसके कारण जल स्तर में तेजी से गिरावट आई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि निजी नलकूप खनन पर अभी रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले महीनों में, विशेषकर मई-जून में, गंभीर पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यह प्रतिबंध भविष्य के इसी संकट को टालने के लिए लगाया गया है।

शासकीय योजनाओं को मिलेगी छूट

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में यह भी साफ किया गया है कि यह प्रतिबंध केवल निजी नलकूप खनन पर लागू होगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) सहित अन्य शासकीय योजनाओं के तहत पेयजल आपूर्ति के लिए किए जा रहे बोरवेल और ट्यूबवेल खनन कार्यों पर यह रोक लागू नहीं होगी। इन कार्यों के लिए किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि सरकारी जल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित न हों।

यह आदेश मप्र पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 और इसके संशोधित नियम 2002 की धारा 3 और 6(1) के तहत जारी किया गया है, जो कलेक्टर को जल अभावग्रस्त क्षेत्रों में ऐसे प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है।