रानी कमलापति स्टेशन से रवाना हुई भोपाल एक्सप्रेस जैसे ही आगे बढ़ी, तभी अचानक ट्रेन के बी-2 कोच में आग लगने का अनाउंसमेंट हुआ। घोषणा सुनते ही यात्रियों में हड़कंप मच गया। लोगों को समझ नहीं आया कि क्या सच में आग लगी है या कोई तकनीकी गड़बड़ी है।
चेतक ब्रिज के पास ट्रेन रुकी, यात्रियों में मची भगदड़
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अनाउंसमेंट उस समय हुआ जब ट्रेन चेतक ब्रिज के पास से गुजर रही थी। अचानक हुए इस ऐलान के बाद कोच में बैठे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। जैसे ही ट्रेन रुकी, कई यात्री घबराकर कोच से उतरकर सीधे पटरियों पर पहुंच गए। बच्चों और बुजुर्गों में सबसे ज्यादा डर देखने को मिला। लोग एक-दूसरे को धक्का देते हुए बाहर निकलने लगे। कुछ यात्रियों ने बताया कि उस समय किसी को यह समझने का मौका ही नहीं मिला कि सच क्या है। हर किसी को अपनी जान बचाने की जल्दी थी।
सामने से आती मालगाड़ी ने बढ़ाई लोगों की घबराहट
स्थिति उस समय और ज्यादा खतरनाक हो गई जब सामने से एक मालगाड़ी आती दिखाई दी। पटरी पर खड़े यात्रियों में फिर से अफरा-तफरी मच गई। हालांकि मालगाड़ी की रफ्तार कम थी और रेलवे कर्मचारियों ने तुरंत स्थिति संभाल ली, लेकिन कुछ मिनटों के लिए माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था। यदि समय रहते स्थिति नियंत्रित न होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। यात्रियों का कहना है कि उस समय हर व्यक्ति डर और भ्रम की स्थिति में था।
रेलवे कर्मचारियों की तत्परता से टला बड़ा हादसा
घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और तकनीकी टीम तुरंत मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने यात्रियों को समझाया कि ट्रेन में आग नहीं लगी है और स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है। बी-2 कोच में यात्रा कर रहे यात्री धीरेंद्र सिंह ने बताया कि लोग जान बचाने के लिए ट्रेन से उतर गए थे, लेकिन रेलवे कर्मचारियों ने सभी को शांत कराया और सुरक्षित तरीके से वापस कोच में बैठाया। रेलवे स्टाफ की त्वरित कार्रवाई से स्थिति पर जल्द नियंत्रण पा लिया गया और कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई।
जांच में सामने आया आग नहीं, अनाउंसमेंट की गड़बड़ी
जब तकनीकी टीम ने कोच और पूरे ट्रेन की जांच की, तो पता चला कि आग जैसी कोई घटना हुई ही नहीं थी। यह अनाउंसमेंट संभवतः तकनीकी गलती या गलत सूचना के कारण हुआ। इसके बाद ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया गया। भोपाल स्टेशन पहुंचने पर भी ट्रेन की एक बार फिर जांच की गई ताकि यात्रियों का भरोसा कायम रहे। हालांकि कुछ यात्रियों ने ट्रेन की पूरी जांच की मांग करते हुए नाराजगी भी जताई।
यात्रियों के मन में उठे कई सवाल
घटना के बाद यात्रियों के मन में कई सवाल खड़े हो गए। आखिर बिना पुष्टि के ऐसा अनाउंसमेंट कैसे हुआ? क्या रेलवे की संचार प्रणाली में कोई गड़बड़ी है? अगर सच में आग लगती तो क्या यात्रियों को सही तरीके से सुरक्षित निकाला जा सकता था? कई यात्रियों ने कहा कि अचानक ऐसी घोषणा होने से लोगों में घबराहट फैल जाती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
ट्रेन यात्रा में अफवाह या गलत सूचना कितनी खतरनाक
रेल यात्रा में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। लेकिन अगर गलत सूचना फैल जाए तो वह असली खतरे से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। इस घटना में भी देखा गया कि आग न होने के बावजूद लोग डर के कारण ट्रेन से उतर गए। पटरी पर उतरना अपने आप में बड़ा जोखिम होता है, क्योंकि दूसरी ट्रेन कभी भी आ सकती है। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि सही और समय पर जानकारी देना कितना जरूरी है।





