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बेंगलुरु में प्राइवेट इक्विटी फर्म कर्मचारी से 70 लाख की ठगी, टेलीग्राम पर ‘गलत नंबर’ से दोस्ती कर महिला ने ऐसे फंसाया

Written by:Banshika Sharma
Published:
बेंगलुरु के एक 50 वर्षीय व्यक्ति से बिटकॉइन ट्रेडिंग के नाम पर 70 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई है। स्कैमर्स ने टेलीग्राम पर एक महिला बनकर पहले दोस्ती की और फिर मोटे मुनाफे का लालच देकर पीड़ित को अपनी सारी बचत और लोन की रकम एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश करवा दी।
बेंगलुरु में प्राइवेट इक्विटी फर्म कर्मचारी से 70 लाख की ठगी, टेलीग्राम पर ‘गलत नंबर’ से दोस्ती कर महिला ने ऐसे फंसाया

साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और स्कैमर्स लोगों को फंसाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला बेंगलुरु से सामने आया है, जहां एक प्राइवेट इक्विटी फर्म में काम करने वाले 50 वर्षीय शख्स ने 70 लाख रुपये गंवा दिए। उनकी सिर्फ एक गलती थी — उन्होंने टेलीग्राम पर एक अनजान नंबर से आए ‘गलत मैसेज’ का जवाब दे दिया था।

यह मामला एक क्लासिक ‘पिग बुचरिंग’ स्कैम का उदाहरण है, जहां स्कैमर पहले पीड़ित से दोस्ती कर भरोसा जीतता है और फिर उसे एक आकर्षक निवेश योजना में फंसाकर उसकी सारी जमा-पूंजी लूट लेता है। पीड़ित ने अपनी सारी बचत ही नहीं, बल्कि बैंक और फाइनेंस फर्म से लोन लेकर भी पैसे इस घोटाले में लगा दिए।

टेलीग्राम पर एक ‘गलत मैसेज’ से हुई शुरुआत

पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, इस पूरे फ्रॉड की कहानी पिछले साल 30 नवंबर को शुरू हुई। कोडिहल्ली निवासी पीड़ित को टेलीग्राम पर ‘प्रिया अग्रवाल’ नाम की एक महिला का मैसेज मिला। मैसेज में लिखा था कि वह किसी राहुल से संपर्क करना चाहती है, लेकिन गलती से मैसेज पीड़ित को चला गया।

पीड़ित ने मैसेज को नजरअंदाज करने की बजाय उस पर रिप्लाई कर दिया, जिसके बाद दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया। कुछ ही दिनों में यह बातचीत टेलीग्राम से WhatsApp पर शिफ्ट हो गई। प्रिया ने खुद को ब्रिटेन के लिवरपूल का निवासी बताया और कहा कि वह एक फैमिली बिजनेस चलाती है।

बिटकॉइन ट्रेडिंग और करोड़ों के मुनाफे का झांसा

धीरे-धीरे जब पीड़ित का भरोसा बढ़ गया, तो प्रिया ने ऑनलाइन बिटकॉइन ट्रेडिंग का जिक्र करना शुरू कर दिया। उसने दावा किया कि वह पिछले 4-5 सालों से इसमें निवेश कर रही है और उसे खूब मुनाफा हुआ है। उसने पीड़ित को भी निवेश करने के लिए मना लिया और बेहतर रिटर्न के साथ-साथ ट्रेडिंग में गाइड करने का भी वादा किया।

प्रिया द्वारा भेजे गए एक लिंक पर क्लिक करके पीड़ित ने एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर अपना अकाउंट बनाया। 9 दिसंबर को उसने 50,000 रुपये का अपना पहला निवेश किया। यह रकम प्लेटफॉर्म की तथाकथित कस्टमर सपोर्ट टीम द्वारा दिए गए बैंक खाते में ट्रांसफर की गई। जब प्लेटफॉर्म के डैशबोर्ड पर मुनाफा दिखने लगा, तो उसका विश्वास और पक्का हो गया।

इसके बाद दिसंबर से 14 जनवरी के बीच, उसने आठ अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 70 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। उसे ट्रेडिंग की ऐसी लत लगी कि उसने फंड का इंतजाम करने के लिए लोन तक ले लिया। इस दौरान उसके फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट में मुनाफा बढ़कर 2.6 करोड़ रुपये तक दिखने लगा था।

ऐसे हुआ धोखाधड़ी का खुलासा

घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब पीड़ित ने अपने अकाउंट से पैसे निकालने की कोशिश की। कई प्रयासों के बावजूद वह पैसे नहीं निकाल सका। उसे बताया गया कि उसका अकाउंट फ्रीज कर दिया गया है। जब उसने कस्टमर सपोर्ट से संपर्क किया, तो उससे टैक्स और प्रोसेसिंग फीस जैसे बहानों से और पैसे जमा करने के लिए कहा गया।

“हमने लोगों को सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों के मैसेज का जवाब देने से सावधान किया है, खासकर उन मैसेज से जो जल्दी और ज्यादा इन्वेस्टमेंट रिटर्न का वादा करते हैं। ऐसे ‘गलत मैसेज’ वाली बातचीत का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड करने के लिए जाल के तौर पर किया जा रहा है।” — ईस्ट साइबर क्राइम पुलिस

इसके बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि वह एक बड़े घोटाले का शिकार हो चुका है। उसने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। ईस्ट साइबर क्राइम पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।