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ओला-उबर ड्राइवरों की घटती कमाई के खिलाफ आज देशभर में हड़ताल, जानें 35 लाख वर्कर्स क्यों हैं परेशान?

Written by:Rishabh Namdev
Published:
देशभर में ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट सेवाओं से जुड़े लाखों ड्राइवर आज हड़ताल पर हैं। यह विरोध प्रदर्शन घटती कमाई, शोषण और सरकार द्वारा न्यूनतम किराया तय न किए जाने के खिलाफ हो रहा है, जिससे ओला, उबर और रैपिडो जैसी सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।
ओला-उबर ड्राइवरों की घटती कमाई के खिलाफ आज देशभर में हड़ताल, जानें 35 लाख वर्कर्स क्यों हैं परेशान?

अगर आप आज कहीं आने-जाने के लिए ओला, उबर या रैपिडो जैसी ऐप-आधारित कैब या बाइक टैक्सी बुक करने की सोच रहे हैं, तो आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। देशभर में शनिवार को ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट सेवाओं से जुड़े लाखों कर्मचारी एक दिन की हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल का आह्वान तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) ने किया है।

यह हड़ताल ड्राइवरों की लगातार घटती कमाई, कंपनियों द्वारा बढ़ते शोषण और सरकार की ओर से न्यूनतम बेस फेयर को लेकर कोई ठोस कदम न उठाए जाने के विरोध में हो रही है। इस हड़ताल के कारण दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे महानगरों में यातायात पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है, जहां लाखों लोग इन सेवाओं पर निर्भर हैं।

ड्राइवरों की मुख्य मांगें और आरोप क्या हैं?

यूनियनों का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकारें मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस-2025 के प्रावधानों को लागू करने में विफल रही हैं। इन दिशानिर्देशों में न्यूनतम किराया तय करने का नियम है, लेकिन अब तक इसे अधिसूचित नहीं किया गया है। इसका फायदा उठाकर एग्रीगेटर कंपनियां मनमाने ढंग से किराया तय कर रही हैं, जिससे ड्राइवरों का मुनाफा लगातार कम हो रहा है।

ड्राइवरों का कहना है कि कंपनियां किराया घटाती जा रही हैं, जबकि गाड़ी के रखरखाव, ईंधन और अन्य ऑपरेशनल जोखिम पूरी तरह से ड्राइवरों पर डाल दिए गए हैं। इसके चलते उनके काम के घंटे तो बढ़ गए हैं, लेकिन कमाई में भारी गिरावट आई है। देशभर में ओला-उबर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर करीब 35 लाख ड्राइवर पंजीकृत हैं, जो इस व्यवस्था से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।

“गाइडलाइंस-2025 में किराया तय करने से पहले मान्यता प्राप्त यूनियनों से परामर्श अनिवार्य है, लेकिन सरकारों की निष्क्रियता के चलते प्लेटफॉर्म कंपनियां ड्राइवरों का शोषण बढ़ा रही हैं।” — शेख सल्लाउद्दीन, संस्थापक अध्यक्ष, TGPWU और नेशनल जनरल सेक्रेटरी, IFAT

सरकार से क्या है वर्कर्स की मांग?

ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। TGPWU ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को एक पत्र लिखकर न्यूनतम किराया तय करने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि एक निश्चित बेस फेयर तय होने से कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी और ड्राइवरों को उनकी मेहनत का सही मुआवजा मिल सकेगा।

यह पहली बार नहीं है जब गिग वर्कर्स ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई है। इससे पहले 31 दिसंबर 2023 को भी IFAT से जुड़े डिलीवरी वर्कर्स ने देशव्यापी हड़ताल की थी। उस समय यह विरोध 10 मिनट में डिलीवरी, कम वेतन और सामाजिक सुरक्षा के अभाव जैसे मुद्दों को लेकर था। उस हड़ताल के बाद कई कंपनियों ने अपनी ब्रांडिंग से ’10-मिनट डिलीवरी’ का दावा हटा दिया था।