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भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन को हाईकोर्ट ने क्यों माना अवमानना का दोषी? सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी पर आज होगी सजा

Written by:Banshika Sharma
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन को एक संपत्ति पर तोड़फोड़ की कार्रवाई में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन न करने पर अवमानना का दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि आयुक्त ने तय प्रक्रिया की अनदेखी की और अब उन्हें सजा पर अपना पक्ष रखना होगा।
भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन को हाईकोर्ट ने क्यों माना अवमानना का दोषी? सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी पर आज होगी सजा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में भोपाल नगर निगम की आयुक्त संस्कृति जैन को अदालत की अवमानना का दोषी करार दिया है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित तोड़फोड़ की प्रक्रिया का पालन किए बिना एक निजी संपत्ति पर कार्रवाई करने से जुड़ा है। अदालत ने इसे शीर्ष अदालत के निर्देशों की गंभीर अनदेखी माना है।

यह पूरा विवाद मार्लिन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका (WP No. 37713/2025) से शुरू हुआ। कंपनी ने आरोप लगाया था कि नगर निगम के अमले ने 18 नवंबर, 2025 को उसकी संपत्ति के सामने के हिस्से (MOS) को ध्वस्त कर दिया था, जिसके लिए कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

क्या थी नगर निगम की दलील और कोर्ट ने क्या पाया?

सुनवाई के दौरान नगर निगम ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि संबंधित निर्माण अवैध था। निगम के अनुसार, 7 नवंबर, 2024 को दी गई निर्माण की अनुमति को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद 14 मई, 2025 को एक नोटिस जारी किया गया और फिर नियमानुसार कार्रवाई की गई।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले (2025) 5 SCC 1 का हवाला देते हुए कहा कि तोड़फोड़ से पहले पालन किए जाने वाले स्पष्ट दिशा-निर्देश मौजूद हैं। इस मामले में, न तो याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया गया, न ही सुनवाई की कोई कार्यवाही दर्ज की गई और न ही कोई अंतिम आदेश पारित किया गया। इसके बावजूद सीधे तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी गई, जो प्रथम दृष्टया गलत है।

अदालत का कड़ा रुख

हाईकोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि नगर निगम आयुक्त ने अपनी गलती नहीं मानी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि आयुक्त बिना शर्त माफी मांगतीं और तोड़े गए हिस्से को फिर से बनाने का आश्वासन देतीं, तो मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता था।

लेकिन, आयुक्त ने अदालत में साफ कर दिया कि निर्माण को बहाल करना संभव नहीं है। इस जवाब के बाद कोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सीधी अवहेलना मानते हुए कड़ा रुख अपनाया और आयुक्त को अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(b) के तहत दोषी ठहराया।

अब इस मामले में सजा की मात्रा पर सुनवाई के लिए 6 फरवरी, 2026 की तारीख तय की गई है। उस दिन सुबह 10:30 बजे आयुक्त को सजा के प्रश्न पर अपना पक्ष रखना होगा।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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