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भोपाल नगर निगम का बजट हुआ पेश, विकास में खर्च होंगे ₹3938.45 करोड़, कोई नया टैक्स नहीं बढ़ाया गया

Written by:Banshika Sharma
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भोपाल नगर निगम की महापौर मालती राय ने शहर के विकास के लिए ₹3938.45 करोड़ का बजट पेश किया है। इस बजट में नागरिकों पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है, लेकिन पुराने वादों के अधूरे रहने और सदन में गोमांस के मुद्दे पर हुए हंगामे ने बैठक को गरमा दिया।
भोपाल नगर निगम का बजट हुआ पेश, विकास में खर्च होंगे ₹3938.45 करोड़, कोई नया टैक्स नहीं बढ़ाया गया

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के विकास के लिए ‘शहर सरकार’ ने अपना सालाना बजट पेश कर दिया है। महापौर मालती राय ने वित्तीय वर्ष के लिए 3938.45 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तुत किया, जिसमें शहर के विकास से जुड़े कई नए वादे किए गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस बार प्रॉपर्टी या जल कर में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, लेकिन यह बजट पुराने अधूरे कामों और सदन में हुए जोरदार हंगामे के लिए भी चर्चा में रहा।

बजट बैठक की शुरुआत ही हंगामेदार रही। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष शाबिस्ता जकी ने गोमांस और स्लॉटर हाउस का मुद्दा उठाया, जिसके बाद सदन में तीखी बहस छिड़ गई। महापौर मालती राय और नेता प्रतिपक्ष के बीच इस मुद्दे पर नोंक-झोंक हुई। बीजेपी के वरिष्ठ पार्षदों सुरेंद्र बाडिका और विलास राव घड़गे ने भी इस पर कड़ा विरोध जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

टैक्स नहीं बढ़ा, पर परिसीमन शुल्क से बढ़ेगा बोझ

इस बजट में नागरिकों को सीधे तौर पर कोई नया टैक्स नहीं देना होगा। मंत्री और विधायकों की आपत्तियों के बाद निगम ने टैक्स बढ़ाने का फैसला टाल दिया है। लेकिन, वार्डों में परिसीमन शुल्क (delimitation fee) बढ़ाने की तैयारी है, जिसका असर कई उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। पिछले साल नगर निगम का बजट 3611 करोड़ रुपए का था, जिसकी तुलना में इस बार बजट के आकार में बढ़ोतरी की गई है।

पुराने वादे अधूरे, महापौर-अध्यक्ष के फंड पर कैंची

एक तरफ जहां नए विकास कार्यों के दावे किए गए हैं, वहीं पिछले कई वादे अब भी अधूरे हैं। करीब दो साल से चर्चा में रहे 7 हेरिटेज गेट और गीता भवन बनाने जैसे प्रोजेक्ट अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, एक साल में सिर्फ दो हेरिटेज गेट के लिए ही भोपाल-इंदौर हाईवे और होशंगाबाद रोड पर भूमिपूजन हो सका है।

इस बार के बजट में एक बड़ा बदलाव यह भी है कि महापौर, अध्यक्ष, एमआईसी मेंबर और जोन अध्यक्ष के लिए आवंटित होने वाला विशेष फंड खत्म कर दिया गया है। पिछले बजट में मेयर के लिए 10 करोड़, अध्यक्ष के लिए 5 करोड़ और एमआईसी सदस्यों के लिए 1-1 करोड़ रुपए का प्रावधान था। विभाग के हालिया आदेश के बाद इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है।

कई प्रस्ताव पास, पुराना कचरा हटाने का प्रस्ताव अटका

हंगामे के बीच सदन में कुछ महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। शहर में नई पार्किंग व्यवस्था बनाने और सड़कों से कंडम (बेकार) वाहनों को हटाने का प्रस्ताव पास हो गया। हालांकि, लिगेसी वेस्ट यानी पुराने कचरे को हटाने का प्रस्ताव पास नहीं हो सका।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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