एसएटीआई विदिशा यानि सम्राट अशोक टेक्नीकल इंस्टीटयूट विदिशा प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगे हैं ये आरोप ग्रांट और एरियर भुगतान को लेकर लगे हैं, शिकायतकर्ता ने राज्य शासन को इसकी जानकारी भेजकर उच्च स्तरीय जाँच की मांग की है।
शिकायतकर्ता चेतन सिंह राजपूत ने मीडिया को जानकारी देते हुए आरोप लगाये कि एसएटीआई प्रबंधन ने छठवे वेतन आयोग के तहत पात्र कर्मचारियों को उनका हक नहीं दिया, जबकि कुछ अपात्र लोगों को नियम विरुद्ध लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। इस मुद्दे ने शासन की निगरानी व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चेतन सिंह राजपूत ने आरोप लगाया है कि कॉलेज में भुगतान प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर गड़बड़ियां की गईं। उनके मुताबिक कुछ कर्मचारियों का एरियर तैयार ही नहीं किया गया, जबकि 89 दिनों की अल्पकालिक सेवा को नियमित सेवा मानकर भुगतान गणना की गई। साथ ही 1 अप्रैल 2000 के बाद नियमित हुए कर्मचारियों को भी एरियर लाभ देने का मामला सामने आया है।
भुगतान पर रोक की मांग
राजपूत का आरोप है कि स्वीकृत पदों की स्थिति और पात्रता संबंधी नियमों को नजरअंदाज कर कुछ लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाने की कोशिश हुई। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, संदिग्ध भुगतानों पर रोक और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप उसे मिल रहीं धमकियाँ
डायरेक्टर 2017 से 2021 तक हटा दिया था लेकिन उनका अभी लिस्ट में नाम है और उनको इस अवधि का भुगतान भी किया गया जो नियम विरुद्ध है, उन्होंने कहा कि ये सिर्फ इंजीनियरिंग कॉलेज का मामला नहीं है हमारी मांग है कि जब तक पूरी जाँच नहीं हो जाती तब तक इस संस्था के सभी चारों कॉलेज को मिलने वाली सरकारी ग्रांट पर रोक लगाई जाए राजपूत ने आरोप लगाये कि उन्हें इस मामले से दूर रहने के लिए धमकियाँ दे रहे हैं इसलिए मैंने मीडिया के सामने बातें रखीं हैं मैं चाहता हूँ।






