भोपाल में हाल ही में दो दिनों तक चले युवा विधायक सम्मेलन में देश के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। दरअसल इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के 50 से ज़्यादा युवा विधायकों ने हिस्सा लिया है। सम्मेलन के दौरान राजस्थान के शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकारी शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक सीधा और साहसिक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि आज के समय में हमें सरपंच तो पढ़े-लिखे चाहिए, लेकिन विधायक अनपढ़ हैं। ऐसे में विकास कैसे संभव होगा? भाटी ने सवाल उठाया है कि जिस देश को 2047 तक विकसित भारत बनने का लक्ष्य दिया गया है, वह अपने तमाम जनप्रतिनिधियों के भरोसे कैसे आगे बढ़ पाएगा, जब वे सिर्फ ‘रबर स्टैंप’ बनकर रह जाएं। उन्होंने जोर दिया है कि विधायकों को पढ़ना होगा और सदन में उनके बयान इतने दमदार होने चाहिए कि अधिकारी दीर्घा में भी उनकी चर्चा हो।
सरकारी स्कूलों में पढ़ें जनप्रतिनिधियों के बच्चे
दरअसल रविंद्र सिंह भाटी ने शिक्षा के बजट पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि हर साल शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये आवंटित होते हैं, लेकिन क्या एक स्कूल के गिरने और दूसरा बनने से शिक्षा का स्तर सुधर पाएगा? उन्होंने एक बड़ा सुझाव देते हुए कहा है कि पिछले विधानसभा सत्र में उन्होंने राजस्थान विधानसभा में यह बात रखी थी कि क्यों न ऐसा बिल लाया जाए कि तमाम जनप्रतिनिधियों, यानी विधायकों, सांसदों और बड़े अधिकारियों के बच्चे और उनकी आने वाली पीढ़ियां सरकारी स्कूलों में पढ़ें। भाटी ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की विधानसभाओं से भी ऐसे ही बिल की मांग करने को कहा है। उन्होंने पूछा है, “क्यों गरीब का बेटा ही सरकारी स्कूल में जाए, हमारे बेटे भी पढ़ें?” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि कितने विधायक ऐसे हैं जो अपने गांवों के स्कूलों में जाकर यह देखते हैं कि शिक्षक समय पर आ रहे हैं या नहीं। भाटी के मुताबिक, ऐसे विधायकों की संख्या बहुत कम है।
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नशेड़ियों और अवैध धंधों के लिए फोन नहीं करूंगा: गुरवीर सिंह
वहीं राजस्थान के सादुलशहर से बीजेपी विधायक गुरवीर सिंह ने एक और गंभीर मुद्दे पर अपनी बात रखी है, जो युवाओं के भविष्य से जुड़ा है, और वह है नशाखोरी। दरअसल गुरवीर सिंह का क्षेत्र पाकिस्तान सीमा पर है, जहां से ड्रोन के जरिए लगातार नशा गिराया जाता है। उन्होंने बताया है कि पैसे के लालच में युवा भटक जाते हैं, जिसका नुकसान गुजरात, पंजाब से लेकर जम्मू-कश्मीर तक देखने को मिलता है। उन्होंने चिंता जताई है कि उनके क्षेत्र में 16-17 साल के बच्चे इंजेक्शन या मेडिकेटेड नशे से अपनी जान गंवा रहे हैं।
गुरवीर सिंह ने कहा कि “मैं जब विधायक बना था तो सादुलशहर की जनता के सामने पहला संकल्प गुरुद्वारा ग्रंथ साहिब के सामने लिया था कि मैं जब तक सेवा में हूं मेरा एक भी फोन किसी नशेड़ी या अवैध धंधे के लिए नहीं जाएगा। मैं उस संकल्प पर बिल्कुल अटल हूं।”
दरअसल गुरवीर सिंह ने उन परिवारों के दर्द को भी साझा किया है, जिन्होंने अपने बच्चों को नशे की वजह से खोया है। उन्होंने कहा है कि अक्सर उन्हें ऐसे फोन आते हैं, जहां विवाहित लड़कों की पत्नियां और माता-पिता मदद मांगते हैं। सूचना मिलते ही सरकार और पुलिस की तरफ से कठोर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी बताया है कि केंद्र सरकार की ओर से एक नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, और एयरफोर्स स्टेशन ड्रोन को निष्क्रिय करने पर काम कर रहे हैं, जिससे जल्द ही इस समस्या पर काबू पाया जा सकेगा। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि राजनीतिक मतभेद भुलाकर नशे के खिलाफ मिलकर काम करें।
हर चुनाव लोकतंत्र की मंडी लगती है: सिद्धार्थ कुशवाह
वहीं मध्य प्रदेश के सतना से कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाह ने लोकतंत्र के भविष्य को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि कई बार ऐसा लगता है कि क्या 2047 तक हमारा लोकतंत्र बचेगा भी या नहीं। जिस तरह हर चुनाव में लोकतंत्र की मंडी लगाई जाती है और चुनाव जीतने के लिए असाधारण प्रयास किए जाते हैं, उसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि आने वाले चुनावों में क्या होगा।
कुशवाह ने देश के पहले वोटर, हिमाचल के शिक्षक नेगी जी का जिक्र करते हुए कहा है कि जब करोड़ों लोग वोट डालते हैं, तो वे क्या सोचकर वोट डाल रहे हैं। आज राजनीतिक दल चुनाव लड़ने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं, तो आने वाले समय में क्या होगा? क्या यह लोकतंत्र व्यवसाय के रास्ते पर चल रहा है? उन्होंने यह भी कहा है कि उन्होंने बहुत सारे जनप्रतिनिधियों को देखा है, जो हैं तो जनसेवा में, लेकिन उनका पूरा समय अपने कारोबार को खड़ा करने में लगा रहता है। घंटे-दो घंटे छोड़कर उनका पूरा ध्यान खुद को स्थापित करने में लगा रहता है, बजाय जनता की सेवा के।