बैतूल। वाजिद खान. मध्यप्रदेश के बैतूल में लॉक डाउन के दौरान कुछ अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है । प्रशासन का आदेश का पालन ना करने वाले जो लोग बेवजह शहर में घूम रहे हैं ,उनको पुलिस कुछ अलग ढंग से समझा रही है बिना मास्क लगाए जो लोग शहर में घूम रहे हैं उन्हें रोककर पुलिस उनके हाथों में एक पोस्टर देती है और उसके बाद फोटो खींचती है इस पोस्टर में लिखा है ” मैं समाज का दुश्मन, मैं घर पर नही रहूंगा” । इससे घूमने वाले लोग शर्मिंदा हो रहे है । दरअसल दुनिया में दहशत का पर्याय बन चुके कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए मध्य प्रदेश के बैतूल को लॉक डाउन किया गया है । प्रशासन ने लॉक डाउन के दौरान लोगों को अपने घरों में रहने के आदेश दिए हैं लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग शहर में घूमते नजर आ रहे हैं और जो लोग बिना मास्क के घूम रहे है । जहां आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो चुका है तो वहीं लोगों को इस खतरनाक वायरस से बचाने के लिए जिला एवं पुलिस प्रशासन जमीन आसमान एक किए हुए हैं, लेकिन लोगों को प्रशासन की इस परेशानी के साथ-साथ अपनी जान की भी चिंता नहीं है यही वजह है कि लोग बेखौफ होकर प्रशासन के निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए सड़कों पर घूम रहे हैं । पुलिस सड़क पर घूमने वाले कई लोगों को घर का रास्ता दिखाया पुलिस ने लोगों की समझाइश के लिए गांधीगिरी का रास्ता अपनाया और एक कागज पर मैं समाज का दुश्मन मैं घर नहीं रहूंगा लिखकर उस हर आने-जाने वाले के हाथ में देकर फोटो खींची और उन्हें मास्क लगा कर जरूरी काम हो तो ही बाहर निकलने की हिदायत दी जा रही है । पुलिस ने गांधीगिरी का रास्ता अपनाकर लोगों को एक बार फिर समझाइश देने की सार्थक कोशिश जरूर की । गौरतलब है कि इस आपदा से निपटने के लिए पुलिस और प्रशासन का हर अधिकारी और कर्मचारी जी जान से लगा हुआ है ,और लोगों का भी यह फर्ज बनता है कि वह प्रशासनिक निर्देशों का पूरी तरह पालन करें ताकि अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत सफल हो सके और लोगों की जान भी बच सकें ।
कोरोना से जागरूक करने के लिए पुलिस ने चलाई नई मुहिम, दिया हाथ मे पम्पलेट फिर खींच फ़ोटो
Written by:Gaurav Sharma
Published:
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






