पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण के असर के चलते मध्य प्रदेश का मौसम एक बार फिर बदल गया है। मंगलवार को रीवा, शहडोल और सागर संभाग में बादल छाए रहे और बारिश हुई। आज बुधवार को भी 16 जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है।
फिलहाल 9 अक्टूबर तक मौसम का मिजाज यूही बना रहेगा, 10 अक्टूबर से सिस्टम के कमजोर होने से मौसम साफ और शुष्क होने लगेगा। इस दौरान तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। फिलहाल प्रदेश कई जिलों में दिन का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक चल रहा है वहीं न्यूनतम तापमान 17-18 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है।
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आज जबलपुर, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला और बालाघाट में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। 8 और 9 अक्टूबर को कुछ हिस्सों में बारिश होने का अनुमान है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग में दिन में तेज धूप खिलेगी और रात में ठंडक बनी रहेगी।
क्या कहता है मौसम विभाग का पूर्वानुमान
मौसम विज्ञान केंद्र, भोपाल के मुताबिक, वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ, मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल की पछुआ हवाओं में एक ट्रफ के रूप में माध्य समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई पर उत्तर में स्थित है। एक ऊपरी हवा का चक्रवातीय परिसंचरण माध्य समुद्र तल से 0.9 किमी की ऊंचाई पर दक्षिण हरियाणा और उसके आसपास के क्षेत्र के स्थित है।
साथ ही ऊपरी हवा का चक्रवातीय परिसंचरण, पूर्वी यूपी और उसके आसपास के क्षेत्र के अब दक्षिण-पूर्व यूपी और उसके आसपास के क्षेत्र के ऊपर स्थित माध्य समुद्र तल से 0.9 किमी की ऊंचाई तक फैला हुआ है।
इसके अलावा ट्रफ, उत्तरी उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल से लेकर बिहार, झारखंड, विदर्भ और मराठवाड़ा होते हुए मध्य महाराष्ट्र तक माध्य समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई पर बना हुआ है। इन मौसम प्रणालियों के चलते वातावरण में नमी बरकरार है जिसके चलते 9 अक्टूबर तक बादल बारिश की स्थिति बनी रहेगी।
पूरे सीजन में प्रदेश में करीब 4 फीसदी बारिश कम हुई
मध्य प्रदेश में मानसून का सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक होता है। इस बार पूरे सीजन में 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश दर्ज हुई है,जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) होनी चाहिए थी। इस तरह पूरे सीजन में प्रदेश में करीब 4 फीसदी या 1.5 इंच बारिश कम हुई।
चुंकी इस बार मानसून 24 जून को प्रदेश में एंटर हुआ था और 3 अक्टूबर को विदाई हुई है, इस हिसाब से प्रदेश में करीब 100 दिन मानसून सक्रिय रहा। पिछले साल मानसून ने 16 जून 2025 को प्रदेश में प्रवेश किया था और 13 अक्टूबर 2025 को विदा हुआ था।
इस बार पूर्वी मध्य प्रदेश में 4% ज्यादा पानी गिरा, लेकिन पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 12% कम बारिश दर्ज की गई। इसी के चलते प्रदेश के 55 में से 30 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका हालांकि 25 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई। इस सीजन में आलीराजपुर बारिश के मामले में सबसे पीछे रहा। निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से ज्यादा बारिश दर्ज हुई।
25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 जिलों में पानी कम गिरा
- भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में सामान्य से अधिक बारिश हुई।
- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा 4 प्रतिशत ज्यादा रहा लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।
- आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में भी औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है।
- नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई ।