मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर इंदौर के इस्कॉन मंदिर से मध्यप्रदेश के तीसरे “जल गंगा संवर्धन अभियान” का शुभारंभ करेंगे। यह राज्य स्तरीय कार्यक्रम प्रदेश के 55 जिलों में साथ-साथ आयोजित होगा। सभी जिलों, नगरीय निकाय और ग्राम पंचायतों में नदियों और जल स्रोतों के पास भी कार्यक्रमों का आयोजन कर अभियान की शुरुआत की जाएगी।

यह महाअभियान साढ़े तीन महीने तक चलेगा और 30 जून को समापन होगा। अभियान के संचालन की जिम्मेदारी संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री के हाथों में होगी। जिले के कलेक्टर नोडल अधिकारी बनेंगे जो जिला स्तर पर “जल गंगा संवर्धन अभियान समिति” की निगरानी और योजना तैयार करेंगे। समिति में जिला पंचायत अधिकारी, सभी सहभागी विभागों के अधिकारी, सामाजिक संगठन, उद्योगपति, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, संत और स्थानीय प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री करेंगे ‘जल गंगा संवर्धन’ अभियान का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज इंदौर में ‘जल गंगा संवर्धन’ राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ करेंगे। इसके तहत प्रदेशभर में जनभागीदारी से जल संरक्षण का महाअभियान चलेगा। प्रदेश के सभी 55 जिलों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में भी नदियों और अन्य जल स्रोतों के किनारे कार्यक्रम आयोजित कर अभियान को एक साथ प्रारंभ किया जाएगा। यह व्यापक अभियान करीब साढ़े तीन महीने तक चलेगा और 30 जून को इसका समापन होगा।

प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत तैयारी

इस अभियान को राज्यव्यापी स्वरूप देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत तैयारी की गई है। प्रत्येक जिले में प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में इसका क्रियान्वयन होगा, जबकि कलेक्टर को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला जल गंगा संवर्धन समिति न सिर्फ कार्ययोजना तैयार करेगी, बल्कि उसकी सतत निगरानी भी करेगी। इस समिति में विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत से जुड़े लोग, कृषि एवं शोध संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ-साथ स्थानीय संत और प्रतिष्ठित नागरिकों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि अभियान में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके। विकासखंड स्तर पर भी इसी तरह की समितियां बनाई गई हैं, जिनकी जिम्मेदारी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को दी गई है।

जल गंगा संवर्धन अभियान की खास बात यह है कि इसमें शासन के 18 विभागों को एक साथ जोड़कर समन्वित रूप से काम किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को इसका नोडल विभाग बनाया गया है, जबकि नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग सह-नोडल की भूमिका निभाएगा। इसके अलावा वन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, उद्यानिकी, पर्यावरण, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास सहित अन्य विभाग अपने-अपने क्षेत्र में जल संरक्षण से जुड़े कार्य करेंगे।

जल संरक्षण की दिशा में अहम कदम

इस बार अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगभग 2,500 करोड़ रुपये के कार्यों का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत नए तालाबों का निर्माण, पुराने जलाशयों का पुनर्जीवन, कुओं और बावड़ियों की मरम्मत, सूखी नदियों को पुनर्जीवित करने और भूजल पुनर्भरण के लिए संरचनाएं विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही 10 हजार से अधिक चेकडैम और स्टॉपडैम के संधारण और मरम्मत का लक्ष्य भी तय किया गया है, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके और भूजल स्तर में सुधार आए।