MP Breaking News
Google पर फॉलो करें

MP में बनेगी “EKAI City”, सीएम मोहन यादव ने की विज्ञान-प्रौद्योगिकी की समीक्षा, अधिकारियों को दिए निर्देश

सीएम मोहन यादव ने अधिकारियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए समन्वित और प्रभावी प्रयास करने का निर्देश भी दिया। आईटी सेक्टर में 12,500 करोड़ रुपये का निवेश आया है। नए रोजगार भी सृजित हुए हैं। 
CM Mohan Yadav

गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने भोपाल स्थित सीएम हाउस में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कार्यों और अन्य गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि, “विज्ञान और प्रौद्योगिकी भविष्य की अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। राज्य में इस क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। हमें नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास को बढ़ावा देकर प्रदेश को ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का सशक्त केंद्र बनाना होगा।”

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए समन्वित और प्रभावी प्रयास करने का निर्देश भी दिया है। साथ ही निवेश परियोजनाओं को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने को भी कहा गया है। सीएम यादव ने अधिकारियों को गुजरात की तर्ज पर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भी गिफ्ट सिटी बनाने के लिए ठोस प्रयास करने को भी कहा है।

सीएम ने कहा कि, “उज्जैन में मेडी सिटी, साइंस सिटी और इंजीनियरिंग कॉलेज भी तैयार किया जा रही है। इसीलिए यहीं पर मेडिकल, साइंस और टेक्निकल एजुकेशन के एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाए। इसके लिए केंद्र सरकार से भी समन्वय किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए निवेश संवर्धन पर जोर दिया है। उन्होंने विभाग द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रमुख निवेश आकर्षित करने के लिए तैयार की गई विशेष कार्य योजना की समीक्षा की। साथ ही इसे समयबद्ध रूप से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए।

अधिकारियों को ये निर्देश भी दिए गए

विभागीय अधिकारियों से नवाचार आधारित परियोजनाओं को प्राथमिकता देने और निवेशकों के साथ सतत संवाद बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में विभाग की विभिन्न योजनाओं, प्रोग्रेस रिपोर्ट और आगामी कार्य योजनाओं पर भी चर्चा की गई। प्रदेश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई संभावनाओं को साकार करने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग में जरूरी मानव संसाधन की पदपूर्ति करने और  बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को और भी सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

केंद्र को भेजा अहम प्रस्ताव

बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संजय दुबे ने बताया कि उज्जैन में डीपटेक रिसर्च पार्क की स्थापना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। अब इसी प्रस्ताव के तहत उज्जैन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए नई कार्य योजना तैयार कर संशोधित प्रस्ताव भेजा जाएगा। यह सेंटर करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा। डीपटेक रिसर्च पार्क भी इसी सेंटर ऑॅफ एक्सीलेंस का हिस्सा होगा।

उन्होंने यह भी बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा भोपाल में गिफ्ट सिटी बनाने की तैयारी है। इसे ईकाई सिटी (EKAI CITY – एजुकेशन, नॉलेज एण्ड एआई सिटी) के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा करीब 10 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग की जाएगी। राज्य सरकार भी इसमें राशि लाएगी। अमेरिका की चार यूनिवर्सिटी मध्यप्रदेश में अपने कैंपस स्थापित कर सकती हैं, अपर मुख्य सचिव ने बताया उनसे भी समन्वय किया जा रहा है।

उभरता टेक हब बन रहा एमपी

 प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग एम. सेलवेंद्रम ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का एक उभरता हुआ टेक हब बन रहा है। यहां 5 आईटी एसईजेड, 15 से अधिक आईटी पार्क, 50 से अधिक बड़ी आईटी कंपनियां, करीब 1200 से अधिक टेक स्टार्टअप्स कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में तकनीकी शिक्षा प्रदान करने वाले कई संस्थान हैं, जिसमें 300 से अधिक कॉलेज, 50 हजार से अधिक तकनीकी स्रातक-वर्ष, आईआईटी, आईआईआईटीडीएम, आईआईएम, एम्स इत्यादि शामिल हैं। तकनीकी क्षेत्र की 6 नीतियों, एमपी स्टार्ट अप पॉलिसी 2022, पूंजीगत व्यय, ब्याज सब्सिड़ी इत्यादि पर भी चर्चा की।

एमपी टेक सेक्टर में आया करोड़ों का निवेश

बैठक में एम. सेलवेंद्रम ने बताया कि मध्यप्रदेश में टेक सेक्टर में लगभग 12 हजार 500 करोड़ रुपए का निवेश आया है। इससे करीब 50 हजार नए रोजगार का सृजन हुआ है। विभाग आईटी आईटीईएस, क्वांटम और एआई जैसी उभरते तकनीकी सेक्टर, डेटा सेंटर, ईएसडीएम- डेटा सेंटर कम्पोनेंट्स मैनूफेक्चरिंग, सेमी कंडक्टर- पैकेजिंग, डिजाइन, फैबलेस तकनीक, ड्रोन निर्माण, जीसीसी, एवीजीसी- एक्सआर एवं स्पेस टेक पर खास ध्यान पर भी दे रहा है। प्रदेश में इस पूरे सेक्टर के अंतर्गत करीब 5 हजार 892 करोड़ रूपये की मेगा प्रोजेक्ट्स के प्रस्ताव भी पाइपलाइन में हैं।

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →
Follow Us :GoogleNews