सीएम डॉ मोहन यादव ने नई दिल्ली में आयोजित World Leaders Forum 2026 में मध्य प्रदेश में निवेश बढ़ाने से लेकर नई अर्थव्यवस्था, ग्रीन एनर्जी और 2047 के विकास लक्ष्यों का रोडमैप सामने रखा। सीएम ने कहा कि कभी मुख्य रूप से कृषि आधारित राज्य के रूप में पहचाने जाने वाले मध्य प्रदेश ने अब उद्योग और निवेश के क्षेत्र में भी तेजी से अपनी जगह बनाई है। बीते एक साल में 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर आया है और कई औद्योगिक इकाइयों ने काम भी शुरू कर दिया है।
सीएम डॉ. यादव ने प्रदेश में शुरू किए गए रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव मॉडल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले संभाग और जिला स्तर पर निवेशकों तक पहुंचने की इस पहल को सराहना मिली और दूसरे राज्यों ने भी इस मॉडल को अपनाया।
900 से ज्यादा कानून और 2700 सर्कुलर खत्म
मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश की राह आसान बनाने के लिए सरकार ने 900 से ज्यादा गैर जरूरी कानून और 2700 से अधिक अनावश्यक सर्कुलर खत्म किए हैं। जन विश्वास अधिनियम लागू करने के साथ निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में पर्याप्त लैंड बैंक के साथ बिजली और पानी की उपलब्धता है। निवेशकों को 29 दिन के भीतर जमीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। दावोस में निवेशकों ने उसी दिन भूमि आवंटन कराया और इनमें से कई परियोजनाओं का भूमिपूजन भी हो चुका है। निवेश प्रोत्साहन सब्सिडी भी डीबीटी के जरिए निवेशकों तक पहुंचाई गई है।
अलग-अलग क्षेत्रों की ताकत के हिसाब से उद्योग
प्रदेश में औद्योगिक विकास को लेकर सरकार अलग-अलग क्षेत्रों की विशेषताओं के हिसाब से काम कर रही है। मालवा में कॉटन उत्पादन को देखते हुए गारमेंट सेक्टर, सीधी-सिंगरौली जैसे क्षेत्रों में खनन और ऊर्जा तथा नर्मदापुरम के बाबई-मोहासा में एनर्जी सेक्टर के लिए औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं।
ग्वालियर क्षेत्र में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन विकसित करने की तैयारी है। सीएम के मुताबिक इसके लिए केंद्र सरकार के साथ एमओयू किया गया है और दिल्ली व मुंबई में हुए निवेश सम्मेलनों के बाद करीब 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। झांसी से लगे क्षेत्र के आसपास डिफेंस कॉरिडोर पर भी काम किया जा रहा है।
ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की ऊर्जा क्षमता अभी 31 गीगावाट है, जिसमें ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सोलर और विंड एनर्जी के साथ पंप स्टोरेज को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने प्रदेश के निर्यात का जिक्र करते हुए बताया कि 55 में से 37 जिलों से निर्यात हो रहा है और इसका आंकड़ा 88 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। मध्य प्रदेश देश का तीसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य भी है।
2047 तक प्रति व्यक्ति आय 22.50 लाख करने का लक्ष्य
World Leaders Forum में सीएम डॉ. यादव ने 2047 के मध्य प्रदेश की तस्वीर भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1.67 लाख रुपये से अधिक हो गई है और वर्ष 2047 तक इसे 22.50 लाख रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
स्वास्थ्य और शिक्षा के विस्तार का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2002-03 तक प्रदेश में केवल पांच मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब इनकी संख्या 39 हो गई है। उनके कार्यकाल में 15 नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए हैं। दो वर्षों में तीन शासकीय विश्वविद्यालय शुरू हुए हैं और प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों सहित कुल 73 विश्वविद्यालय संचालित हैं।
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश का लक्ष्य किसी एक क्षेत्र तक औद्योगिक विकास को सीमित रखने के बजाय प्रदेश के हर हिस्से को निवेश और विकास से जोड़ना है। उन्होंने केन-बेतवा लिंक और पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए राज्यों के बीच समन्वय को भी विकास के लिए जरूरी बताया।







