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कांग्रेस ने MP सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरा, उमंग सिंघार बोले ‘यह सुशासन नहीं, भ्रष्टाचार का संस्थागत मॉडल’

Written by:Shruty Kushwaha
Published:
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब जिम्मेदार अधिकारियों पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं तब सुशासन की बात करना सिर्फ खोखला दावा है। उन्होंने कहा कि राज्य को दलालों और कमीशनखोरी से मुक्त करना मुख्यमंत्री की प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि जनता को न्यायसंगत और पारदर्शी व्यवस्था मिल सके।
कांग्रेस ने MP सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरा, उमंग सिंघार बोले ‘यह सुशासन नहीं, भ्रष्टाचार का संस्थागत मॉडल’

Umang Singhar

कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मध्यप्रदेश सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उमंग सिंघार ने भाजपा पर भ्रष्टाचार के संस्थागत मॉडल का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से मुख्य सचिव के एक कथित बयान को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं मानते हैं कि “बिना पैसे लिए कोई कलेक्टर काम नहीं करता”। उन्होंने कहा कि ‘यह सुशासन नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का संस्थागत मॉडल है।’

इससे पहले भी कांग्रेस ने विभिन्न घोटालों, कमीशनखोरी और कुप्रबंधन के आरोप लगाकर सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरती रही है। जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं में वो भ्रष्टाचार का आरोप लगा चुकी है। इसी के साथ खाद संकट हो या फिर इंदौर में जल त्रासदी..विपक्ष इसे व्यवस्थागत भ्रष्टाचार बताते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधती रहा है।

उमंग सिंघार ने भ्रष्टाचार को लेकर सरकार को घेरा 

उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश की मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से उन्होंने कहा है कि ‘मुख्य सचिव स्वयं कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री का कहना है बिना पैसे लिए कोई कलेक्टर काम नहीं करता” यह बयान भाजपा सरकार में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोलती सच्चाई है।’ उन्होंने कहा कि अगर सीएम स्वयं ये बात कह रहे हैं तो इससे साबित होता है कि भ्रष्टाचार किस तरह प्रदेश में अपनी जड़ें जमा चुका है।

मुख्यमंत्री से की ये मांग

इस मुद्दे पर अब सरकार को घेरते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि ‘मुख्यमंत्री जी, यह विपक्ष का आरोप नहीं, आपकी ही व्यवस्था की स्वीकारोक्ति है।’ उन्होंने सवाल किया कि जब जिले चलाने वाले जिम्मेदार अफसर ही लेन-देन की स्वार्थी प्रक्रिया में जकड़े हों, तो आम जनता को न्याय, सेवा और पारदर्शिता कैसे मिलेगी। उमंग सिंघार ने कहा कि यह सुशासन नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का संस्थागत मॉडल है। इसी के साथ उन्होंने जनता की तरफ से मांग की है कि मध्यप्रदेश को दलालों और कमीशनखोरी से मुक्त किया जाए और यही मुख्यमंत्री की प्राथमिकता होनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि विभिन्न सरकारी दफ्तरों में बिना लेनदेन के कोई काम नहीं होता। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आम लोग इस बात को कई बार दोहरा चुके हैं और अब स्वयं मुख्यमंत्री ये कह रहे हैं इसलिए कम से कम अब तो भ्रष्टाचार निर्मूलन के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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