अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को लेकर अमर्यादित टिप्पणी करने वाले कांग्रेस विधायक फूलसिंह बरैया को भले ही पार्टी का साथ नहीं मिला लेकिन वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह उनेक बचाव में आ गए हैं, दिग्विजय सिंह ने कहा बरैया ने कहा दिया है ये उनका बयाना नहीं है , अब यदि कार्रवाई करनी है तो उन्सपर कीजिये जिन्होंने ये सब लिखा, दिग्विजय सिंह के बयान के बाद भाजपा ने पलटवार किया है।
मध्य प्रदेश के भांडेर से कांग्रेस विधायक फूलसिंह बरैया ने बीते दिनों एक बयान देकर प्रदेश से लेकर देश की सियासत में उबाल ला दिया उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को लेकर अमर्यादित टिप्पणी की उनके साथ होने वाले दैहिक शोषण को एक पुस्तक का हवाला देते हुए जस्टिफाई किया, जब बवाल मचा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित पार्टी ने उनके बयान से किनारा कर लिया तो बरैया ने कहा मैंने पटना के एक प्रोफ़ेसर का बयान का उदाहरण दिया था वो मेरा बयाना नहीं है।
हालाँकि उससे पहले ही पूरे प्रदेश में बरैया की निंदा होने लगी भाजपा सहित कई संगठनों ने उनके बयान को महिला विरोधी और घ्रणित मानिसकता का बताया, भाजपा ने बयान के अगले ही दिन राहुल गांधी को बरैया के साथ इंदौर में मंच साधा करने पर जबरदस्त घेरा , मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने राहुल गांधी से कहा कि बरैया को पार्टी स एबाहर करें और महिलाओं से माफ़ी मांगे।
दिग्विजय सिंह ने किया बरैया का बचाव
इतना सब होने के बाद आज जब मीडिया ने दिग्विजय सिंह से बरैया के बयान पर उनकी राय जाननी चाही तो दिग्विजय सिंह अपने विधायक के बचाव में दिखाई दिए, दिग्विजय ने कहा बरैया ने कह दिया है कि एय उनका बयान नहीं है उन्होंने पटना विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर झा के बयान का उदाहरण दिया था अब यदि कार्रवाई करनी है तो बरैया पर नहीं लिखें वाले प्रोफ़ेसर झा पर करिए।
भाजपा ने किया दिग्विजय सिंह पर हमला
दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने पलटवार किया है , उन्होंने X पर लिखा- “दिग्विजय सिंह द्वारा फूल सिंह बरैया का बचाव, कांग्रेस के नैतिक दिवालियापन की खुली स्वीकारोक्ति है।यदि बरैया के शब्द उनके निजी विचार नहीं थे, तो ऐसी घृणित और महिला-विरोधी बयान देने की आवश्यकता ही क्या थी?
शब्द गलत थे, तो कांग्रेस ने सार्वजनिक खंडन क्यों नहीं किया?
उन्होंने पूछा- “क्या किसी पुस्तक का हवाला देकर महिलाओं की गरिमा पर प्रहार जायज़ हो जाता है? क्या सार्वजनिक रूप से दिए गए बयान की जिम्मेदारी वक्ता की नहीं होती? और यदि वे शब्द गलत थे, तो कांग्रेस ने उसी समय सार्वजनिक खंडन क्यों नहीं किया? “बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया”,यह तर्क नहीं, पीड़ित समाज की भावनाओं का अपमान है।
BJP ने कहा- अब बहाने नहीं, जवाब चाहिए
आशीष अग्रवाल ने लिखा- सच्चाई साफ़ है- बरैया ने आपत्तिजनक शब्द बोले और राहुल गांधी ने मंच साझा किया फिर भी कांग्रेस नेतृत्व मौन रहा और अब सफाइयाँ दी जा रही हैं। यह कोई “संदर्भ” नहीं, कांग्रेस की महिला-विरोधी और दलित-विरोधी मानसिकता का सार्वजनिक प्रदर्शन है। कांग्रेस या तो ऐसे बयानों की जिम्मेदारी ले या देश की मातृशक्ति और SC-ST समाज से बिना शर्त माफी माँग कर अपने दूषित विधायक को निष्कासित करे। पोस्ट के अंत में भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी ने लिखा- अब बहाने नहीं, जवाब चाहिए।





