MP Breaking News

बालाघाट में बच्चों की मौत पर उमंग सिंघार का सरकार पर हमला, बोले “आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, जवाब चाहिए”

कांग्रेस ने इस मामले पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मृतकों की वास्तविक संख्या सार्वजनिक करने और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकारी आंकड़ों और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी में अंतर है।
Leader of the Opposition Umang Singhar

Umang Singhar

बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की लगातार हो रही मौतों को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर वास्तविक स्थिति छिपाने और मौतों के आंकड़ों को लेकर भ्रम पैदा करने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि “बालाघाट में मासूमों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा, मौतों का आंकड़ा 26 तक पहुंच गया है और सरकार अब भी आंकड़ों की बाजीगरी में लगी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि एक बच्चे के माता-पिता के पहुंचने से पहले ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। और सवाल उठाया कि क्या यही सरकार की संवेदनशीलता है।

आंकड़ों को लेकर पहले से विवाद

बालाघाट के बिरसा विकासखंड के कई बैगा बहुल गांवों में जून के अंत से बच्चों और अन्य लोगों के बीमार पड़ने के मामले सामने आए हैं। शुरुआती दौर में प्रशासन ने छह से आठ बच्चों की मौत की पुष्टि की थी, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विपक्ष की ओर से मृतकों की संख्या इससे काफी अधिक होने के दावे किए गए। 14 अगस्त को उमंग सिंघार ने प्रभावित गांवों का दौरा कर 19 बच्चों की मौत का आरोप लगाया था। उस समय उन्होंने सरकार पर वास्तविक आंकड़े छिपाने का आरोप भी लगाया था। बाद में प्रशासन की ओर से आठ मौतों की बात सामने आई। वहीं स्थानीय स्तर पर मृतकों की संख्या 20 से अधिक होने के दावे लगातार सामने आते रहे।

बीमारी की वजह को लेकर भी सामने आए अलग-अलग तथ्य

प्रभावित बच्चों में बुखार, त्वचा संबंधी संक्रमण, मलेरिया, खसरा, दस्त और पोषण संबंधी समस्याएं सामने आने की जानकारी दी गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार शुरुआत में बीमारी के सटीक कारण की जांच के लिए रक्त और पानी के नमूने विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों को भेजे गए थे। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में घर-घर सर्वे, स्वास्थ्य जांच, अस्थायी चिकित्सा केंद्र और मलेरिया नियंत्रण जैसी गतिविधियां शुरू की हैं। 22 अगस्त तक प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने, कुपोषित बच्चों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र भेजने के निर्देश दिए गए थे।

इस मामले में सरकार ने जिला टीकाकरण अधिकारी और जिला मलेरिया अधिकारी को उनके प्रभार से हटाया है। उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने प्रभावित गांवों का दौरा कर परिवारों से मुलाकात की थी और जांच के बाद जिम्मेदारी तय करने की बात कही थी।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
Follow Us :GoogleNews