मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत बैंक ऋण के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया मंडीदीप शाखा से जुड़े 72 लाख रुपये के लोन घोटाले में बैंक के तत्कालीन अधिकारियों, निजी फर्म संचालक और लाभार्थी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। यह कार्रवाई विस्तृत जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर की गई है।
यह फर्जीवाड़ा एक पुरानी 120 टन क्षमता वाली ट्रक-माउंटेड क्रेन की खरीद दिखाकर किया गया, जबकि वास्तव में क्रेन का स्वामित्व बदल दिया गया और इसे दूसरे फाइनेंसर के पास गिरवी रख दिया गया। योजना के तहत लाभार्थी को 21 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी भी मिली, लेकिन लोन की किस्तें नहीं चुकाई गईं।
क्या है मामला
यह मामला तब सामने आया जब सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक ने 22 अक्टूबर 2021 को भोपाल स्थित EOW कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विजय पाल सिंह परिहार, प्रोपराइटर एस.बी./एस.वी. इंटरप्राइजेस, मंडीदीप, ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत ऋण लेते समय तथ्यों को छिपाया और भ्रामक जानकारी देकर बैंक व सरकारी योजना को नुकसान पहुंचाया। प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।
EOW की जांच में सामने आया कि वर्ष 2017 में एस.बी./एस.वी. इंटरप्राइजेस नामक फर्म के नाम पर 120 टन क्षमता की पुरानी ट्रक-माउंटेड क्रेन की खरीद दिखाकर 72 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराया गया। परियोजना लागत कागजों में एक करोड़ रुपये दर्शाई गई, जिसमें 28 लाख रुपये मार्जिन मनी बताई गई। इसी आधार पर शासन की योजना के अंतर्गत 21 लाख रुपये की सब्सिडी/सहायता भी प्राप्त की गई।
जांच में कई अनियमितताएं उजागर
जांच के दौरान कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। जिस क्रेन को बैंक के पास गिरवी बताया गया था, वह पहले से एक्सिस बैंक में बंधक थी और उसकी एनओसी नहीं ली गई। बैंक ने न तो रीजनल ऑफिस की अनुमति प्राप्त की और न ही आरटीओ में हाइपोथिकेशन दर्ज कराया। भुगतान एक कंपनी के खाते में किया गया, जबकि वाहन का पंजीकरण दूसरी कंपनी के नाम पर था। बाद में वही क्रेन लियो इंजीनियरिंग सर्विस के नाम ट्रांसफर होकर टाटा फाइनेंस के पास गिरवी रखी गई।
किस्तें समय पर जमा न होने के कारण वर्ष 2020 में लोन खाता NPA घोषित किया गया। इसके बाद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय प्रबंधक रवि चंद्र गोयल ने अक्टूबर 2021 में EOW, भोपाल में लिखित शिकायत दर्ज कराई। EOW ने बैंक रिकॉर्ड, RTO, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (DIC) और अन्य विभागों से दस्तावेजों का सत्यापन कर आरोपों की पुष्टि की।
इनपर दर्ज किया गया है मामला
ईओडब्ल्यू ने विजय पाल सिंह परिहार (प्रोपराइटर – एस.बी./एस.वी. इंटरप्राइजेस), ज्ञानेन्द्र सिंह असवाल (संचालक – लियो इंजीनियरिंग सर्विस), ऑल कार्गो लॉजिस्टिक लिमिटेड के संचालक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन शाखा प्रबंधक वी.वी. अय्यर के साथ लोन प्रभारी बी.एस. रावत के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, धोखाधड़ी 409, अमानत में खयानत 120-B आपराधिक षड्यंत्र तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1)(क) सहपठित 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।





