अशोकनगर जिले के थाना शाढौरा में 11 वर्षीय मासूम बच्ची का 15 सितंबर 2024 को दुष्कर्म करने वाले आरोपी पिता को पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं अर्थदंड तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 351 (2) के अंतर्गत अतिरिक्त 02 वर्ष का कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया। वहीं आरोपी माता को पॉक्सो अधिनियम की धारा 16 एवं 17 के अंतर्गत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया है। आरोपियों को यह सजा पुलिस की उत्कृष्ट विवेचना और त्वरित कार्यवाही के चलते माननीय विशेष न्यायाधीश श्री प्रकाश केरकेट्टा के न्यायालय में सुनाई गयी।
पुलिस की तत्पर कार्रवाई का नतीजा
पुलिस अधीक्षक अशोकनगर राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र कंवर के मार्गदर्शन में थाना शाढौरा में प्रकरण में उत्कृष्ट विवेचना एवं त्वरित कार्यवाही के फलस्वरूप आरोपियों को कठोर दंड दिलाया गया है।
यह था मामला
16 सितंबर 2024 को थाना शाढौरा में एक 11 वर्षीय नाबालिग बालिका द्वारा उपस्थित होकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि 15.09.2024 की रात्रि में, जब वह अपने घर पर अपने सौतेले पिता के साथ अकेली थी, तब आरोपी द्वारा उसके साथ अत्यंत जघन्य, अमानवीय एवं घृणित कृत्य किया गया। घटना के पश्चात आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी देकर चुप रहने का दबाव बनाया।
पीड़िता ने माँ को बताया
पीड़िता द्वारा साहस का परिचय देते हुए अपनी माता को घटना की जानकारी दी गई, किन्तु उसकी माता द्वारा भी उसे चुप रहने एवं किसी को जानकारी न देने के लिए दबाव डाला गया। इसके बावजूद बालिका ने अदम्य साहस दिखाते हुए स्वयं थाना पहुँचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक नरेन्द्र त्रिपाठी द्वारा त्वरित कार्यवाही प्रारंभ की गई। उपनिरीक्षक संध्या रघुवंशी द्वारा पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया एवं आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार कर उसका मेडिकल परीक्षण एवं डीएनए सैंपल संकलित किए गए। विवेचना के दौरान घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण कर भौतिक एवं वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्रित कर एफएसएल भेजे गए। प्राप्त डीएनए रिपोर्ट आरोपी के विरुद्ध पुष्टिकारक सिद्ध हुई। साथ ही पीड़िता के कथन न्यायालय में विधि अनुसार दर्ज कराए गए, जिसमें आरोपी पिता द्वारा किए गए अपराध एवं माता द्वारा सहयोग की पुष्टि हुई।
विशेष न्यायालय में अभियोग
सम्पूर्ण विवेचना पूर्ण कर 08.11.2024 को विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। न्यायालय में अभियोजन एवं बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के पश्चात विशेष न्यायाधीश प्रकाश केरकेट्टा द्वारा आरोपीगण को दोषसिद्ध पाया गया। इस प्रकरण में थाना शाढौरा पुलिस, एफएसएल टीम, चिकित्सकीय दल एवं अभियोजन अधिकारी के संयुक्त प्रयासों, सूक्ष्म विवेचना एवं प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप आरोपियों को कठोर दंड सुनिश्चित किया जा सका। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिला एवं बालिकाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाते हुए लगातार प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। ऐसे प्रकरणों में न्यायालय द्वारा दी जा रही कठोर सजा समाज के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि इस प्रकार के जघन्य अपराधों में लिप्त आरोपियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही यह भी आवश्यक है कि पीड़ित निर्भीक होकर सामने आएं और अपराध की सूचना दें, जिससे उन्हें समय पर न्याय मिल सके ।





