भोपाल। आर्थिक तंगी से जूझ रही प्रदेश की कमलनाथ सरकार के लिए नई रेत नीति बड़ी फायदेमंद साबित हो रही है| रेत से होने वाली आमदनी सरकार का खजाना भरेगी| रेत खदानों के लिए बुलाई गई ऑनलाइन निविदाओं के जरिए मध्य प्रदेश सरकार को 1234 करोड़ रुपए से अधिक की आमदनी होगी। रेत के टेंडर से अप्रत्याशित राजस्व की प्राप्ति तय है, वहीं सभी संभागों में से सर्वाधिक ग्वालियर संभाग में आरक्षित मूल्य से 500 प्रतिशत से ज्यादा राजस्व मिलने की संभावना है|
खनिज साधन मंत्री प्रदीप जायसवाल ने बताया कि सरकार ने मात्र एक साल के भीतर पिछली सरकार की तुलना में पांच गुना राजस्व बढ़ाया है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में रेत से प्राप्त होने वाले वाला राजस्व मात्र 240 करोड़ रुपए था। मीडिया से चर्चा में मंत्री ने कहा सरकार ने रेत की उपलब्धता के आधार पर 43 जिलों के समूह बनाए थे और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए निविदाएं आमंत्रित की थीं, जिसमें 243 निविदाएं प्राप्त हुई थीं। फिलहाल 36 जिलों से प्रदेश सरकार को 1234 करोड़ रुपए की आमदनी होनी है। उन्होंने कहा कि इसका ऑफसेट प्राइस 448 करोड़ रखा गया था। आफसेट प्राइस से भी तीन गुना अधिक राजस्व सरकार को प्राप्त होने वाला है। पांच गुना राजस्व बढ़ाने का मध्य प्रदेश ने नया कीर्तिमान पहली बार बनाया, जो अपने आप में रिकॉर्ड है।
सात जिलों में एकमात्र निविदा अभी प्राप्त नहीं हुई है, जिसके लिए निविदा बुलाने की पुन: कार्यवाही की जा रही है। मंत्री ने उम्मीद जताई कि जिन सात जिलों में अभी निविदाएं की जानी हैं उनसे और राजस्व प्राप्त होगा तो राजस्व के आंकड़े और बढ़ने की उम्मीद है।





