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“छात्रों की गूंज” से पहले जीतू पटवारी ने सीएम डॉ. मोहन यादव को लिखा पत्र, MP की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने प्रदेश के विद्यार्थियों और अभिभावकों से जुड़े शिक्षा संबंधी मुद्दों को सरकार के सामने रखा है। पत्र में उन्होंने विश्वविद्यालयों की मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए शिक्षकों की नियुक्ति, परीक्षा व्यवस्था और परिणामों को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की है।
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Jitu Patwari

मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने इंदौर में 19 सितंबर को होने वाले राहुल गांधी के कार्यक्रम “छात्रों की गूंज” के संदर्भ में प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी, परीक्षा और परिणाम में देरी तथा मूल्यांकन संबंधी गड़बड़ियों का सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है।इसी के साथ सरकार से विश्वविद्यालयों की व्यवस्था सुधारने के लिए समयबद्ध कदम उठाने की मांग की है।

कांग्रेस नेता ने पत्र में कहा कि “छात्रों की गूंज” छात्र हित से जुड़ा गैर-राजनीतिक आयोजन है, जिसका उद्देश्य शिक्षा से संबंधित समस्याओं और आवश्यकताओं को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था जिस संकट से गुजर रही है, वह केवल राजनीतिक आरोप नहीं है बल्कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट, विधानसभा में सरकार की ओर से दिए गए जवाब और अलग-अलग विश्वविद्यालयों से सामने आए तथ्यों से भी इसकी तस्वीर स्पष्ट होती है।

जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

उन्होंने ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में वर्ष 2021-22 से 2023-24 के दौरान परीक्षा और परिणाम में लगातार देरी दर्ज की गई। स्नातकोत्तर प्रथम और तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाओं के परिणाम में 244 से 380 दिन तक की देरी सामने आई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इसका असर विद्यार्थियों के अगले कक्षा में प्रवेश, प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरी के आवेदन पर पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय के स्वीकृत शैक्षणिक पदों में लगभग 72 प्रतिशत पद रिक्त पाए गए।

17 सरकारी विश्वविद्यालयों में 793 सहायक प्राध्यापक पद खाली

प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी को लेकर भी जीतू पटवारी ने सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने पत्र में विधानसभा में उपलब्ध सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 17 सरकारी विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के 1,069 स्वीकृत पदों में से 793 पद रिक्त थे। उन्होंने खरगोन के क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां सहायक प्राध्यापक के 80, सह प्राध्यापक के 40 और प्राध्यापक के 20, यानी सभी 140 स्वीकृत शैक्षणिक पद रिक्त बताए गए हैं।

रिजल्ट में गड़बड़ियों से परीक्षा व्यवस्था पर सवाल

जीतू पटवारी ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की रिजल्ट संबंधी शिकायतों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग मामलों में अंक दर्ज करने और विषय संबंधी त्रुटियों के साथ पास विद्यार्थियों को फेल दिखाए जाने जैसी शिकायतें सामने आईं। उज्जैन के दिग्विजय विश्वविद्यालय में एक विद्यार्थी की अंकसूची में 1600 में 1604 अंक दर्ज होने की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं।

अलग-अलग विश्वविद्यालयों की घटनाओं को बताया गंभीर संकट

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर में परीक्षा के लगभग एक वर्ष बाद स्नातकोत्तर डिप्लोमा का परिणाम जारी होने, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर में बीसीए विद्यार्थियों के परिणाम और मूल्यांकन को लेकर उठे सवाल तथा अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा में प्रवेश पत्र पर परीक्षा का गलत समय दर्ज होने के मामलों को भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र में शामिल किया। उनका कहना है कि इन घटनाओं को अलग-अलग देखने के बजाय एक साथ देखा जाए तो प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक जवाबदेही और अकादमिक अनुशासन की स्थिति पर गंभीर सवाल उठते हैं।

आरजीपीवी के पुनर्गठन पर किए सवाल

जीतू पटवारी ने आरजीपीवी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 585 से अधिक संबद्ध महाविद्यालयों के दबाव के कारण परीक्षा और परिणाम व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आई है और अब विश्वविद्यालय को तीन हिस्सों में बांटने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार को यह प्रशासनिक बोझ पहले क्यों नहीं दिखाई दिया। परीक्षा और प्रश्नपत्रों की गोपनीयता से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे भी गंभीर चिंता का विषय बताया।

परीक्षा में देरी से विद्यार्थियों का पूरा करियर प्रभावित

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि परीक्षा में देरी का असर सिर्फ परिणाम तक सीमित नहीं रहता। परिणाम देर से आने पर अगली कक्षा में प्रवेश प्रभावित होता है और इसका असर डिग्री, नौकरी तथा प्रतियोगी परीक्षाओं तक पहुंचता है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग के ई-प्रवेश पोर्टल का उदाहरण देते हुए कहा कि पूरक परीक्षा परिणाम देर से आने के कारण विद्यार्थियों के प्रवेश नवीनीकरण से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए पोर्टल दोबारा खोलना पड़ा।

रिक्त पदों और लंबित परिणामों की रिपोर्ट मांगी

जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से प्रदेश के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों में स्वीकृत और रिक्त शैक्षणिक पदों की विश्वविद्यालयवार स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही रिक्त पदों को भरने के लिए समयबद्ध कैलेंडर जारी करने और परीक्षा व परिणाम के लिए बाध्यकारी अकादमिक कैलेंडर लागू करने की मांग की। उन्होंने पिछले तीन वर्षों में निर्धारित समय से देरी से हुई परीक्षाओं, लंबित परिणामों और इससे प्रभावित विद्यार्थियों की विश्वविद्यालयवार रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखने की भी मांग की।

बोले “युवाओं को घोषणाएं नहीं, शिक्षक और समय पर परिणाम चाहिए”

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं इसलिए वे इस समस्या की गंभीरता को बेहतर समझ सकते हैं। जीतू पटवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल भवन और नाम से नहीं चलते बल्कि उनकी पहचान शिक्षक, कक्षाओं, परीक्षा व्यवस्था और समय पर आने वाले परिणामों से होती है। उन्होंने सरकार से कहा कि मध्यप्रदेश के युवाओं को घोषणाओं की बजाय शिक्षक, भाषणों की बजाय समय पर परीक्षा और आश्वासन के बजाय समय पर परिणाम चाहिए।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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