भोपाल में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मप्र द्वारा ज़िला चिकित्सालय, भोपाल में संचालित “मनकक्ष” के माध्यम से तीन कार्यक्रम आयोजित किये गए।
ये कार्यक्रम जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी, भोपाल, पीएम श्री शासकीय नवीन कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, तुलसी नगर तथा पुलिस (पी एस ओ) प्रशिक्षण केंद्र, भोपाल में आयोजित किये गए।
क्यों माया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस हर वर्ष 10 सितंबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आत्महत्या जैसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे को लेकर जागरूकता बढ़ाना, इससे जुड़े कलंक को कम करना और जरूरतमंद लोगों तक समय पर मदद पहुंचाना है। इस दिवस की शुरुआत 2003 में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन और विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से हुई थी।
यह समस्या सिर्फ मानसिक बीमारी तक सीमित नहीं है बल्कि आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत संकट भी इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समय रहते जोखिम के संकेतों की पहचान, संवेदनशील संवाद, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और सामाजिक सहयोग आत्महत्या की रोकथाम में अहम भूमिका निभाते हैं।
भोपाल में कार्यक्रम आयोजित
इस अवसर पर भोपाल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मप्र द्वारा ज़िला चिकित्सालय में तीन कार्यक्रम आयोजित हुए। इन सभी कार्यक्रमों में आत्महत्या की बढ़ती समस्या के कारणों को रेखांकित करते हुए इसके लिए संवेदनशील व्यक्तियों की पहचान और आत्महत्या की रोकथाम के प्राथमिक हस्ताक्षपो पर विस्तार से चर्चा की गई। इन कार्यक्रमों में मनोचिकित्सक डॉ आर के बैरागी, डॉ अर्शदीप कौर, चिकित्सा मनोवैज्ञानिक राहुल शर्मा, मनोरोग नर्सिंग अधिकारी सपना राय, डॉ मनोज गौड़, जैनिट मलिक और शुचि अग्रवाल ने लोगों को सम्बोधित किया।
महत्वपूर्ण चर्चा हुई
इस अवसर पर लोगों को आत्महत्या रोकने में सहायक “मित्रम” (गेटकीपर्स ) की संकल्पना और आवश्यकता से भी परिचित करवाया गया। साथ ही निःशुल्क मनो-परामर्श सेवा टेलीमानस (14416) तथा स्वयं की मानसिक समस्याओं को स्क्रीन करने में अतिमहत्वपूर्ण “mannhit” एप की विस्तार से जानकारी दी गई। इन सभी कार्यक्रमों में लगभग 450 लोगों ने भागीदारी की।







