भोपाल विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने सोमवार को गांधी प्रतिमा के समीप धरना देकर विधानसभा सचिवालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। मानसून सत्र के पहले दिन यह घटनाक्रम तब सामने आया जब जौरा से विधायक पंकज उपाध्याय ने कैलारस शक्कर कारखाने से संबंधित अपने प्रश्नों को बार-बार निरस्त किए जाने के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की। कांग्रेस विधायक उपाध्याय ने स्पष्ट आरोप लगाया कि विधानसभा सचिवालय द्वारा उनके सवालों को लगातार निरस्त किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया न केवल विधायी परंपराओं का उल्लंघन है, बल्कि एक जनप्रतिनिधि के तौर पर उन्हें प्राप्त संवैधानिक और विधायी अधिकारों का सीधा हनन भी है। इस तरह की कार्यप्रणाली लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
जौरा से कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने कैलारस शक्कर कारखाने से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर अब तक कुल पांच बार प्रश्न लगाए हैं। इन प्रश्नों में दिसंबर 2025, मार्च-अप्रैल 2026 और जुलाई 2026 के विधानसभा सत्रों के दौरान पूछे गए प्रश्न भी शामिल हैं। हालांकि, विधायक उपाध्याय ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इन पांच प्रयासों में से चार बार उनके प्रश्नों को विधानसभा सचिवालय द्वारा बिना किसी ठोस कारण के निरस्त कर दिया गया। उन्होंने इस स्थिति को अपने कर्तव्यों के निर्वहन में एक बड़ी बाधा बताया।
विधानसभा अध्यक्ष और प्रमुख सचिव से मांगा जवाब
विधायक उपाध्याय ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा से कई अवसरों पर इन प्रश्नों के निरस्त होने का कारण जानना चाहा, परंतु उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि सोमवार को भी जब उन्होंने प्रमुख सचिव से पुनः कारण पूछा, तब भी उन्हें कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला। इसी उदासीनता और जवाबदेही की कमी के विरोध स्वरूप उन्हें विधानसभा परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष धरने पर बैठना पड़ा। विधायक पंकज उपाध्याय ने दृढ़ता से अपनी बात रखते हुए कहा कि जब तक उनके जनहित से जुड़े प्रश्नों का उचित उत्तर नहीं दिया जाएगा, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा और वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
विधायक पंकज उपाध्याय ने प्रश्न पूछने के अधिकार को एक विधायक का मूलभूत संवैधानिक और विशेषाधिकार बताया। उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि यदि जनहित से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों को बिना किसी वैध कारण के बार-बार निरस्त किया जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों और व्यवस्था के सर्वथा विपरीत है। उनके अनुसार, यह जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर सीधा कुठाराघात है और इससे जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इस प्रक्रिया को अलोकतांत्रिक और अस्वीकार्य करार दिया।
पंकज उपाध्याय के प्रदर्शन को अन्य विधायकों का मिला समर्थन
विधायक पंकज उपाध्याय के इस विरोध प्रदर्शन को कांग्रेस के अन्य कई विधायकों का तत्काल समर्थन प्राप्त हुआ। धरने के मौके पर पहुंचे पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कैलारस शक्कर कारखाने के मुद्दे को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके स्वयं के विधानसभा क्षेत्र में भी शक्कर कारखाने से संबंधित ऐसे ही मामले लंबित हैं, जहां विधायकों को प्रश्न पूछने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व मंत्री सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि यदि जनप्रतिनिधियों से प्रश्न पूछने जैसा मूलभूत अधिकार भी छीन लिया जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के लिए एक अत्यंत गंभीर चुनौती होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी ही स्थितियां बनी रहीं और विधायकों के अधिकारों का हनन जारी रहा, तो विपक्ष को भविष्य में और भी कड़े तथा निर्णायक कदम उठाने पड़ सकते हैं ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।





