कमलनाथ ने देश में रसोई गैस की बढ़ती किल्लत पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कई हिस्सों में गैस की भारी कमी ने आम लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी है। गैस एजेंसियों पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं, लोग घंटों इंतजार कर रहे हैं और कई जगहों पर सिलेंडर मिलने में दिनों की देरी हो रही है।
उन्होंने कहा कि “एक सेकंड में हजारों बुकिंग होने से सर्वर तक क्रैश हो रहे हैं। यह दृश्य किसी आपातकाल जैसी स्थिति का अहसास कराता है।” कांग्रेस नेता ने कहा कि इतनी कठिनाई के बावजूद सरकार के मंत्री और अधिकारी कह रहे हैं कि ‘कोई किल्लत नहीं है’। उन्होंने सवाल किया कि “अगर कमी नहीं है तो ये कतारें किसकी गवाही दे रही हैं? लोग धूप में घंटों क्यों खड़े हैं?”
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कमलनाथ ने गैस की किल्लत पर सरकार को घेरा
कमलनाथ ने रसोई गैस को लेकर हो रही मारामारी पर ने केंद्र और राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने इसे सरकार की पुरानी आदत बताया कि संकट आने पर समस्या स्वीकार करने के बजाय इनकार, सफाई और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है। कांग्रेस नेता ने कहा कि रसोई गैस जैसी बुनियादी जरूरत पर भी हालात बिगड़ गए हैं, घरों की रसोई ठंडी पड़ रही है, होटल-ढाबों में स्टॉक कम हो रहा है, फिर भी सरकार संकट से मुंह मोड़ रही है। उन्होंने कहा कि “यह रवैया न सिर्फ असंवेदनशील है बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही के भी खिलाफ है। सरकार के इस तरह के बयान जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसे हैं। जो लोग घंटों लाइन में खड़े होकर गैस लेने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए यह सुनना कि “कोई किल्लत नहीं है” बेहद अपमानजनक लगता है।”
तुरंत समाधान निकालने की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश की स्थिति पर खासतौर से निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में गैस आपूर्ति 30% तक घटी है। उन्होंने सवाल उठाया कि “सिर्फ दस दिन के युद्ध से व्यवस्था डगमगा गई? क्या इतनी कमजोर तैयारी थी?” कमलनाथ ने चेतावनी दी कि अगर सरकार अब भी वास्तविकता से मुंह मोड़ती रही तो यह सिर्फ गैस की किल्लत नहीं रहेगी, बल्कि जनता के भरोसे का संकट बन जाएगा। उन्होंने कहा कि जब जनता का भरोसा टूटता है तो किसी भी सरकार के लिए उससे बड़ा संकट कोई नहीं होता। इसी के साथ उन्होंने मांग की है कि सरकार संकट स्वीकार कर तुरंत प्रभावी कदम उठाए।