लोकसभा स्पीकर के विरुद्ध विपक्ष द्वारा लाये गए अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में दो दिनों तक 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई और कल बुधवार कोअविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया, यानि सदन में अधिकांश सदस्यों ने स्पीकर ओम बिरला में अपना विश्वास जताया है, अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद आज गुरुवार को ओम बिरला लोकसभा पहुंचे और आसंदी पर बैठे, उन्होंने सदन की कार्यवाही शुरू करने से पहले उनके विरुद्ध लाये गए अविश्वास प्रस्ताव पर अपनी बात रखी।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा लोकसभा में मेरे निष्कासन के प्रस्ताव पर 12 घंटे तक चर्चा हुई, जिसमें विपक्ष ने निष्पक्षता पर सवाल उठाए। विपक्ष ने सदन में अपनी आवाज दबाए जाने की बात भी कही। सदन 140 करोड़ भारतीयों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। मैंने हमेशा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि प्रत्येक सदस्य निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही अपनी बात रखे।
विपक्ष ने इस नियम का पालन नहीं किया, उन्हें कठिन निर्णय लेने पड़े
उन्होंने कहा सभी तस्वीरें, मुद्रित सामग्री, उद्धरण और दस्तावेज़ संसद में प्रस्तुत करने से पहले अध्यक्ष की स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य है। विपक्ष ने इस नियम का पालन नहीं किया, जिसके कारण उन्हें कठिन निर्णय लेने पड़े। मैंने हमेशा सदन की कार्यवाही में भाग लेने से हिचकिचाने वालों को प्रोत्साहित किया है।
सदस्यों के माइक को नियंत्रित करने और विपक्ष के माइक बंद करने के आरोपों का जवाब देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अध्यक्ष के पास माइक को नियंत्रित करने के लिए कोई बटन नहीं है। उन्होंने कहा कि सदस्य तभी बोल सकते हैं जब उनकी बारी हो। विपक्ष की महिला सांसदों के विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सांसदों द्वारा तख्तियां लेकर सत्ता पक्ष की बेंच पर हंगामा करने के बाद उन्होंने “संसद की गरिमा की रक्षा” के लिए यह निर्णय लिया।मैंने हमेशा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि सदन निष्पक्ष रूप से और नियमों के अनुसार चले। मैं किसी भी सदस्य को निलंबित करने का प्रयास नहीं करता।
मर्यादा बनाए रखने के लिए अपनी शक्ति का प्रयोग करना मेरा कर्तव्य
उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन निर्णय लेना उन्हें दुख देता है, लेकिन उन्होंने सदस्यों से यह सवाल करने को कहा कि ये निलंबन क्यों आवश्यक हैं। विपक्ष के सदस्यों को संसद के नियमों का उल्लंघन करने के कारण निलंबित किया है। , “नियम 377 के तहत, सदन में मर्यादा बनाए रखने के लिए अपनी शक्ति का प्रयोग करना मेरा कर्तव्य है।
जिस दिन विपक्ष ने मुझे अध्यक्ष पद से हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया, उस दिन मैं सदन की कार्यवाही से दूर रहा। कुर्सी किसी एक व्यक्ति की नहीं होती, बल्कि सदन की प्रतिष्ठा का प्रतीक है। मैं उन सभी का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने मेरे खिलाफ प्रस्ताव पर बहस के दौरान मेरा समर्थन किया या आलोचनात्मक विचार व्यक्त किए। स्पीकर ने कहा कि ये कहा गे अकि नेता प्रतिपस्क्ष को बोलने से रोका गया ये सही नहीं है, नेता प्रतिपक्ष हो या मंत्री या अन्य कोई सदस्य, सदन में नियमों की परिधि में ही उसे बोलने की अनुमति मिलेगी क्योंकि सदन की मर्यादा गरिमा के लिए नियम सबसे ऊपर हैं।






