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“मध्यप्रदेश सरकार देश की सबसे ज्यादा शिक्षा विरोधी सरकार” कमलनाथ का बीजेपी पर हमला

उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों को बंद या मर्ज किए जाने की नीति का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कांग्रेस नेता ने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने और स्कूलों के बंद होने से प्रभावित बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित करने की मांग की।
Kamal Nath

Kamal Nath

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने प्रदेश सरकार को देश की सबसे ज्यादा शिक्षा विरोधी सरकार बताते हुए आरोप लगाया कि सारे दावों के विपरीत बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल से बाहर हो रहे हैं। उन्होंने इसके लिए सरकार के कुप्रबंधन और कम नामांकन वाले सरकारी स्कूलों को बंद या मर्ज करने की नीति को जिम्मेदार ठहराया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले साल लगभग 15 लाख और इस साल लगभग 12 लाख बच्चे स्कूल छोड़ने की स्थिति में पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों को अचानक बंद करने या दूसरे स्कूलों में मर्ज किए जाने से बच्चों के सामने नए स्कूल में दाखिले की समस्या खड़ी हो रही है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है।

स्कूल बंद होने से बढ़ी बच्चों की मुश्किल

रिपोर्ट्स के मुताबिक सत्र 2025-26 में 15.25 लाख बच्चे ऐसे रहे, जो पुराने स्कूल से निकलने के बाद दूसरे स्कूल में प्रवेश नहीं ले सके। वहीं मौजूदा सत्र में 30 अगस्त तक 11.12 लाख बच्चे ड्रॉपआउट श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों में आगे बदलाव की संभावना भी है, क्योंकि स्कूलों में 30 सितंबर तक प्रोविजनल नामांकन दर्ज किए जाते हैं।

ड्रॉपआउट की समस्या का एक बड़ा कारण कम नामांकन वाले सरकारी स्कूलों को बंद करना या दूसरे स्कूलों में मर्ज करना बताया जा रहा है। स्कूल बंद होने के बाद कई बच्चों के लिए दूसरे स्कूल की दूरी 1 से 5 किलोमीटर तक बढ़ गई है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के सामने पैदल स्कूल जाने, परिवहन का खर्च उठाने और सुरक्षा जैसी चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।

12वीं तक पहुंचते 62.7 प्रतिशत बच्चे मुख्यधारा से बाहर

यूडाइस के आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में पहली से 12वीं तक बच्चों की रिटेंशन रेट 37.3 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 51.9 प्रतिशत है। इसका अर्थ है कि प्रदेश में पहली कक्षा में दाखिला लेने वाले बच्चों में से करीब 62.7 प्रतिशत बच्चे 12वीं तक स्कूल की मुख्यधारा में नहीं पहुंच पाते।

हाईस्कूल स्तर पर भी स्थिति में उतार चढ़ाव दर्ज हुआ है। यूडाइस के अनुसार 2025-26 में हाईस्कूल ड्रॉपआउट दर 13 प्रतिशत रही। इसमें छात्रों की दर 14.7 प्रतिशत और छात्राओं की 11.3 प्रतिशत रही, जबकि 2024-25 में कुल दर 8.2 प्रतिशत थी।

कमलनाथ बोले “सरकारी स्कूलों को चौपट करने की कोशिश”

इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सरकार को घेर रही है। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश के बच्चे सरकार की इस नीति से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में बंद या मर्ज किए जा रहे स्कूलों में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा बताई जा रही है। उनके मुताबिक यह स्थिति सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के बजाय उन्हें कमजोर करने की दिशा में बढ़ते कदम का संकेत है। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार ने सरकारी स्कूलों को पूरी तरह चौपट करने का मन बना लिया है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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