भोपाल। मध्य प्रदेश में 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य किए जाने का विरोध जारी है। इस बीच परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है, लेकिन आवेदन करने वाले शिक्षकों की संख्या बेहद कम है। बताया जा रहा है कि TET के दायरे में करीब ढाई लाख शिक्षक हैं, जबकि अब तक सिर्फ 2575 आवेदन ही आए हैं। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 4 सितंबर है।
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर 21 अगस्त से आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। परीक्षा 12 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित है, जबकि अभ्यर्थी 9 सितंबर तक अपने आवेदन में संशोधन कर सकेंगे। कम आवेदन को देखते हुए आवेदन की समय-सीमा बढ़ाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के लिए परीक्षा
ESB की नियम पुस्तिका के अनुसार वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त प्राथमिक और माध्यमिक स्तर से संबंधित शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा रखी गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार संबंधित शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक पात्रता परीक्षा पास करनी होगी।
परीक्षा के दायरे में आने वाले शिक्षकों की पूरी नामवार सूची और कुल संख्या अभी स्पष्ट नहीं की गई है। नियम पुस्तिका में सहायक शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक, सहायक अध्यापक, संविदा शाला शिक्षक वर्ग-3, प्रयोगशाला सहायक और प्राथमिक शिक्षक विज्ञान सहित संबंधित श्रेणियों का उल्लेख किया गया है।
एक प्रश्न-पत्र के लिए 1000 रुपये फीस
परीक्षा में शामिल होने के लिए एक प्रश्न-पत्र की फीस 1000 रुपये तय की गई है। एमपी ऑनलाइन कियोस्क से आवेदन करने पर 60 रुपये और रजिस्टर्ड सिटीजन यूजर के माध्यम से आवेदन पर 20 रुपये पोर्टल शुल्क अलग से लगेगा। आवेदन में पहली बार संशोधन के लिए 20 रुपये और अंतिम चरण में संशोधन के लिए 40 रुपये शुल्क रखा गया है।
इसी फीस और शिक्षकों से आवेदन कराने को लेकर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश शिक्षा विभाग को पात्रता परीक्षा आयोजित कराने का है, इसलिए पहले से नियुक्त शिक्षकों से परीक्षा के लिए आवेदन और शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।
दिल्ली तक पहुंचा विरोध, आवेदन नहीं करने की अपील
TET की अनिवार्यता के विरोध में देशभर के शिक्षक संगठनों ने 30 अगस्त को दिल्ली में प्रदर्शन किया था। मध्य प्रदेश के अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने भी शिक्षकों से फिलहाल परीक्षा के लिए आवेदन नहीं करने की अपील की है। संगठन के प्रतिनिधि लोक शिक्षण आयुक्त और स्कूल शिक्षा मंत्री के सामने भी अपनी आपत्ति रख चुके हैं।
ट्राइबल टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर ने केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अध्यादेश लाने की मांग की है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर भी केंद्र से इस संबंध में कदम उठाने की मांग की जानी चाहिए।
वहीं शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने परीक्षा शुल्क और आवेदन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किन शिक्षकों को परीक्षा देनी है और किन्हें नहीं। शिक्षक संगठनों की मांग है कि TET को लेकर स्थिति स्पष्ट होने तक परीक्षा आयोजित न की जाए।






