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खंडवा में वन विभाग रेंजर द्वारा आदिवासियों से बदसलूकी पर भड़के उमंग सिंघार, BJP को घेरा, मुख्यमंत्री से जांच की मांग

Written by:Shruty Kushwaha
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यहां जमीन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच वन विभाग की कार्रवाई ने हालात तनावपूर्ण बना दिए। दशकों से बसे आदिवासी परिवारों ने हटाने का विरोध किया, वहीं कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल सामने आने से मामला और भड़क गया। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं और पूरे प्रकरण ने आदिवासी अधिकार बनाम सरकारी कार्रवाई की बहस को फिर तेज कर दिया है।
खंडवा में वन विभाग रेंजर द्वारा आदिवासियों से बदसलूकी पर भड़के उमंग सिंघार, BJP को घेरा, मुख्यमंत्री से जांच की मांग

Umang Singhar

खंडवा जिले के नरमलाया गांव में अतिक्रमण हटाने पहुंचे वन रेंजर द्वारा आदिवासी परिवारों को कथित तौर पर धमकाने और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने का मामला अब राजनीतिक स्तर पर गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस घटना को बीजेपी सरकार की आदिवासी विरोधी मानसिकता करार दिया है।

उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री से तुरंत निष्पक्ष जांच करने और दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि प्रदेश में किसी भी आदिवासी के साथ इस तरह का अन्याय एवं अभद्र व्यवहार दोबारा न हो।

ये है मामला 

खंडवा जिले के माथाता विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नरमलाया गांव में वन विभाग की बताई जा रही जमीन पर करीब 20 आदिवासी परिवार दशकों से रह रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन पहले राजस्व विभाग के अंतर्गत थी और उनकी चार पीढ़ियां यहां 80 साल से बसी हुई हैं। 2022 में ओंकारेश्वर क्षेत्र में वन भूमि के बदले राजस्व विभाग ने नरमलाया में 9.36 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को ट्रांसफर की थी। लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी वन विभाग ने इसका कब्जा नहीं लिया था। अब जब अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन के साथ वन अमले के साथ रेंजर शंकर सिंह चौहान पहुंचे तो स्थानीय आदिवासियों ने विरोध जताया। इसी दौरान रेंजर ने गुस्से में कहा “ज्यादा फालतू बात मत करना…मैं यहीं तुम्हारी कब्र बना दूंगा तुम्हारे गांव वाली सब देखते रह जाएंगे”। यह पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें रेंजर की तीखी और धमकी भरी भाषा साफ सुनाई दे रही है।

उमंग सिंघार ने की जांच की मांग 

इस मामले में उमंग सिंघार ने सरकार और प्रशासन को घेरा है। उन्होंने कहा कि “आदिवासी परिवारों को डराने-धमकाने और ‘कब्र बना दूंगा’ जैसी शर्मनाक भाषा का इस्तेमाल भाजपा के तथाकथित सुशासन और आदिवासी प्रेम की असलियत सामने लाता है। यह कोई अलग घटना नहीं है, बल्कि सत्ता के संरक्षण में अधिकारियों द्वारा गरीब और आदिवासी समाज को दबाने की सोच को दर्शाता है।” नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आदिवासी हमारे प्रदेश की अस्मिता हैं। उनके सम्मान और अधिकारों से कोई भी खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आदिवासियों को डराने या कुचलने की हर कोशिश का सशक्त जवाब दिया जाएगा। इसी के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री से कड़े शब्दों में मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषी अधिकारी पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में प्रदेश के किसी भी आदिवासी के साथ इस तरह का अन्याय या अभद्र व्यवहार न हो।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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