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मप्र विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से, अनुपूरक बजट समेत कई विधेयकों पर होगी चर्चा, UCC को लेकर हो सकता है फैसला

Written by:Pooja Khodani
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खबर है कि मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मोहन सरकार यूसीसी लागू करने का प्रस्ताव ला सकती है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो बड़ी संख्या में नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई 2026 तक चलेगा। विधानसभा सचिवालय ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल की स्वीकृति के बाद इस पांच दिवसीय सत्र के लिए 16 जून 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। यह मध्यप्रदेश की 16वीं विधानसभा का 11वां सत्र होगा

विधानसभा सचिवालय के अनुसार, अशासकीय विधेयकों की सूचनाएं देने की अंतिम तिथि 24 जून तय की गई है। इसके अलावा अशासकीय संकल्पों के लिए 9 जुलाई तक और स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण व नियम 267-क के तहत सूचनाएं 14 जुलाई से सुबह 11 बजे से दोपहर 4 बजे के बीच स्वीकार की जाएंगी।

इसके अलावा पांच दिवसीय इस सत्र के दौरान 20 जुलाई से 23 जुलाई तक प्रश्नोत्तर और शासकीय कार्य निपटाए जाएंगे, जबकि सत्र के अंतिम दिन 24 जुलाई को प्रश्नोत्तर काल के साथ अशासकीय संकल्पों पर चर्चा होगी।

इन मुद्दों पर भी चर्चा संभव

  • माना जा रहा है कि सोलहवीं विधानसभा के इस सत्र में मोहन सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश करने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य और विधेयकों को सदन के पटल पर रख सकती है। इसके अलावा अधोसंरचना विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी फोकस रहेगा।
  • मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी), स्वामित्व योजना, अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा और बड़ा फैसला होने की संभावना है। इसके अलावा नई शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विधेयक भी विधानसभा में प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

सत्र छोटे रखने पर नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल

मानसून सत्र की पांच दिनों की संक्षिप्त अवधि को लेकर विपक्ष (कांग्रेस) ने सवाल भी उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि जब सवालों के जवाब न हों, तो सत्र छोटे कर दिए जाते हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र मात्र 5 दिनों के लिए बुलाया गया है। यह केवल विधानसभा की अवधि कम करने का सवाल नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही को सीमित करने का प्रयास है। प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों से चुनकर आए विधायक 7 करोड़ से अधिक जनता की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करते हैं। किसानों की बदहाली, युवाओं की बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बढ़ता कर्ज, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे अनगिनत मुद्दे प्रदेश के सामने खड़े हैं।

उन्होंने आगे लिखा है कि क्या इन सभी विषयों पर गंभीर चर्चा, प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण और जनहित के मुद्दों को केवल 5 बैठकों में समेटा जा सकता है? सरकार को यह समझना होगा कि विधानसभा जितनी चलेगी, लोकतंत्र उतना मजबूत होगा। कांग्रेस विधायक दल मानसून सत्र के हर मिनट का उपयोग जनता के मुद्दों को उठाने और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए करेगा। सरकार चाहे चर्चा से बचे, लेकिन जनता के सवालों से बच नहीं सकती।

सत्ता पक्ष को घेरने की तैयारी करेगा विपक्ष

इस बार के मानसून सत्र में जमकर हंगामा होने के आसार हैं। संभावना है कि विपक्ष, सत्ता पक्ष को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा चुनाव के नामांकन निरस्त होने के साथ-साथ किसानों की समस्याओं, बिजली-पानी की स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों पर घेरने की रणनीति बना सकता है। चर्चा तो ये भी है कि कांग्रेस राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया को लेकर रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ला सकती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को इस संबंध में आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।

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