राजस्थान की एक अदालत द्वारा मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारियों और जवानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और पुलिस व्यवस्था भी गंभीर सवालों के घेरे में है।
उन्होंने कहा कि इस साल 28 जनवरी को आगर-मालवा पुलिस ने राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए कथित तौर पर नशीले पदार्थों की फैक्ट्री का भंडाफोड़ करने का दावा किया था। उस समय करीब 100 पुलिसकर्मियों की टीम कार्रवाई में शामिल बताई गई थी। लेकिन अब राजस्थान की अदालत ने मामले की जांच के बाद पूरी कार्रवाई को संदिग्ध माना है और दो थाना प्रभारियों सहित बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
क्या है मामला
वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। उन्होंने राजस्थान की अदालत द्वारा मध्यप्रदेश पुलिस पर की गई कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। दरअसल राजस्थान की चौमहला एसीजेएम कोर्ट ने मध्यप्रदेश की आगर मालवा पुलिस द्वारा इस साल 28 जनवरी को राजस्थान के झालावाड़ जिले के घाटाखेड़ी गांव में की गई नशीले पदार्थों की छापेमारी को फर्जी और संदिग्ध करार दिया है।
कोर्ट के आदेश पर आगर मालवा के टीआई राशि उपाध्याय और बड़ौद के टीआई रूप सिंह राजपूत समेत लगभग 100 मध्य प्रदेश पुलिसकर्मियों के खिलाफ राजस्थान के डग थाने में FIR दर्ज की गई है। यह घटना अपने आप में असाधारण माना जा रहा है क्योंकि एक राज्य की पुलिस पर दूसरे राज्य की अदालत के आदेश पर इतनी बड़ी संख्या में FIR दर्ज हुई है।
कमलनाथ ने कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा
कमलनाथ ने इस पूरे मामले को भाजपा सरकार की नाकामी और भ्रष्टाचार का प्रमाण बताया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार न तो नशे के माफिया और रैकेट को नियंत्रित कर पा रही है और न ही भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों पर अंकुश लगा पा रही है। उल्टा निर्दोष लोगों को फंसाकर असली अपराधियों को बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में बेहद असाधारण मामला है, जहां दूसरे राज्य की अदालत के आदेश पर मध्यप्रदेश पुलिस के इतने बड़े दल के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। इससे साफ है कि प्रदेश में न केवल नशे का कारोबार बढ़ रहा है, बल्कि उस पर कार्रवाई करने वाली एजेंसियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।






