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मध्यप्रदेश में 9 IAS अफसरों ने दी 1500 एकड़ आदिवासी जमीन बेचने की अनुमति, उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री से की निष्पक्ष जांच की मांग

Written by:Shruty Kushwaha
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इस बारे में किए गए सवाल का जवाब देते हुए सरकार ने विधानसभा में बताया कि खंडवा जिले में सबसे अधिक लगभग 288.6 हेक्टेयर आदिवासी भूमि गैर-आदिवासियों को हस्तांतरण की अनुमति दी गई। इसके अलावा धार, खरगोन और बड़वानी जिलों में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं।
मध्यप्रदेश में 9 IAS अफसरों ने दी 1500 एकड़ आदिवासी जमीन बेचने की अनुमति, उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री से की निष्पक्ष जांच की मांग

Umang Singhar

मध्यप्रदेश में आदिवासियों की बेशकीमती ज़मीन गैर-आदिवासियों को बेचने की अनुमति देने के मामले में 9 आईएएस अफसर सवालों के घेरे में है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस अब प्रदेश सरकार पर हमलावर है। उमंग सिंघार ने सवाल किया है कि जब कानून आदिवासी भूमि की सुरक्षा के लिए बने हैं, तो कलेक्टर स्तर के अधिकारियों ने भूमि हस्तांतरण की अनुमति कैसे दी।

नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा में दी गई जानकारी के बाद आरोप लगाया है कि सरकार इन अफसरों के नाम तो सामने ला रही है लेकिन जमीन खरीदने वाले प्रभावशाली लोगों के नाम उजागर नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

विधानसभा में सरकार ने दी जानकारी, 9 IAS अधिकारी सवालों के घेरे में 

एमपी विधानसभा में कांग्रेस विधायक बाला बच्चन द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सदन को बताया कि राज्य में 9 आईएएस अधिकारियों द्वारा आदिवासियों की लगभग 1500 एकड़ जमीन गैर-आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी गई थी। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, इंदौर जिले में करीब 500 एकड़ जमीन गैर-आदिवासियों को हस्तांतरित करने की अनुमति दी गई जिनमें से कई अनुमतियां तत्कालीन कलेक्टरों और अपर कलेक्टरों द्वारा दी गई थीं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2009 से 2023 के बीच खंडवा जिले में सबसे अधिक लगभग 288.6 हेक्टेयर आदिवासी भूमि गैर-आदिवासियों को हस्तांतरण की अनुमति दी गई। इसके अलावा धार, खरगोन और बड़वानी जिलों में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सदन में बताया कि जिन अनुमतियों के आधार पर जमीन हस्तांतरित हुई उनमें कई आईएएस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। हालांकि सभी मामलों में संबंधित कलेक्टरों के नाम स्पष्ट रूप से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

उमंग सिंघार ने की पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग

इस खुलासे के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि आईएएस अधिकारियों द्वारा पद का दुरुपयोग कर आदिवासियों की बेशकीमती जमीन गैर-आदिवासियों को सौंप दी गई और यह बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून आदिवासी भूमि की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं तो भूमि हस्तांतरण की अनुमति कैसे दी गई। सिंघार ने कहा कि ‘असली खिलाड़ी कौन है..सरकार अफसरों के नाम तो गिना रही है, लेकिन उन रसूखदार खरीदारों के नाम क्यों छिपा रही है।’ इसी के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है और कहा है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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